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उत्तराखण्ड के नाम पर यूपी के क्रिकेटरों का हक मार रहा यूपीसीए: दिव्य नौटियाल

लखनऊ।  (यूपीसीए) उत्तराखण्ड के नमा पर प्रदेश के क्रिकेटरों का हक मार रहा है। वहीं यूपीसीए की दखलअंदाजी के चलते ही उत्तराखण्ड क्रिकेट बदहाल है। उत्तराखण्ड को यूपी से अलग हुए 17 वर्ष हो गये हैं। बावजूद इसके बीसीसीआई ने उत्तराखण्ड राज्य क्रिकेट को मान्यता नहीं दी है। उत्तराखण्ड क्रिकेट एसोसिशनों की आपसी खींचतान के साथ यूपीसीए भी निगेटिव भूमिका निभा रहा है, जिससे मान्यता मिलने में अड़चने व रूकावटें आ रही हैं।
उत्तराखण्ड क्रिकेट एसोसिएशन (यूसीए) के सचिव एवं लखनऊ क्रिकेट एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष श्री दिव्य नौटियाल ने बताया कि, बीसीसीआई से उत्तराखण्ड क्रिकेट को मान्यता न मिलने के चलते देहरादून में होने वाले रणजी मैच को लखनऊ में शिफट कर दिया गया। यूपीसीए नेे नियम कानून को दरकिनार कर देहरादून में रणजी मैच के आयोजन का एलान कर दिया। यूपीसीएस के इस फैसल से नाराज बीसीसीआई ने देहरादून में आयोजित मैच को रद कर दिया। और देहरादून की जगह मैच लखनऊ में हुआ। देहरादून में रणजी मैच के रद होने से राज्य के युवा क्रिकेटरों, दर्शकों व स्थानीय लोगों को भारी निराशा हुई।
श्री दिव्य नौटियाल ने कहाकि, यूपीसीए की तानाशाही का आलम यह है कि उसने रणजी मैच के दौरान लखनऊ क्रिकेट एसोसिएशन को कोई तवज्जो ही नहीं दी। यूपीसीए ने इससे पूर्व दिलीप ट्राफी और रणजी ट्राफी मैच में लखनऊ क्रिकेट एसोसिएशन को पूरे आयोजन से अलग-थलग रखा था। लखनऊ क्रिकेट एसोसिएशन के किसी भी पदाधिकारी को इस बाबत पूछा तक नहीं गया। इससे पूर्व भी यूपीसीए ने गलत तरीके से उत्तराखण्ड राज्य में बीसीसीआई की ट्राफी का आयोजन किया। जो बीसीसीआई के नियमों व गाइड लाइन का पूरी तरह उल्लंघन है।
श्री दिव्य नौटियाल ने कहा कि, उत्तर प्रदेश में 75 जिले हैं। और यूपीसीए ने प्रदेश की 23 जिलों को ही सदस्यता दे रखी है। ऐसे में यूपीसीए पूरे प्रदेश का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। अपना वर्चस्व कायम रखने के लिये यूपीसीए के पदाधिकारी और कर्ता धर्ता शेष जिलों की  क्रिकेट एसोसिएशनों को  सदस्यता हीं नहीं देते हैं। जिसके चलते जिलों से विरोध के स्वर लगातार उभर रहे हैं।
श्री दिव्य नौटियाल ने बताया कि, यूपीसीए पूरे उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व नहीं कर रहा है। बावजूद उसके उसने उत्तराखण्ड के एक जिले देहरादून को 12वें जोन के तौर पर अवैध और गैरकानूनी तरीके से मान्यता दे रखी है। वहीं यूपीसीए उत्तराखण्ड में केवल एक क्रिकेट एसोसिशन को वर्षों से उपकृत कर रहा है। यूपीसीए द्वारा उत्तराखण्ड के एक जिले को गलत तरीके से मान्यता देने के कारण उत्तर प्रदेश के खिलाड़ियों का हक मारा जा रहा है। जबकि नियमानुसार एक राज्य किसी दूसरे राज्य को मान्यता नहीं दे सकता है।
श्री दिव्य नौटियाल ने कहाकि, ये सारा मामला बीसीसीआई के संज्ञान में है। बावजूद इसके वो इस गंभीर मसले और बड़ी गलती की ओर आंखें मूंदे बैठा है। कहाकि, बीसीसीआई को चाहिए कि यूपीसीए द्वारा अवैध तरीके से बनाये गये 12वें जोन को खत्म करे। जब  तक बीसीसीआई उत्तराखण्ड राज्य को मान्यता प्रदान नहीं करता है तब तक उसे विभिन्न क्रिकेट प्रतियोगिताओं में प्रत्येक आयु वर्ग में पांच खिलाड़ी उत्तराखण्ड से चयनित करने चाहिएं। जिससे उत्तराखण्ड राज्य के खिलाड़ियों का मनोबल बढ़े और उनका पलायन रूके।
श्री दिव्य नौटियाल ने कहाकि, बीसीसीआई को उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिशन को यह निर्देश देने चाहिएं कि, वो उत्तराखण्ड राज्य में कार्यरत चारों क्रिकेट एसोसिएशनों में से एक-एक पदाधिकारी को यूपीसीए का सदस्य बनाये। जिससे उत्तराखण्ड की यूपीसीए के आला पदाधिकारी से जुड़ी एक क्रिकेट एसोसिशन का वर्चस्व समाप्त हो सके। बीसीसीआई को यूपीसीए को यह निर्देश भी देने चाहिए कि उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों की जिला इकाइयों को सदस्य बनाये। तभी उत्तर प्रदेश के समस्त क्रिकेटरों को उनका वाजिब हक मिलेगा।

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