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गंगा सफाई के लिए बनी 184 परियोजनाएं, केवल 46 पर हुआ काम%!%!%!%!%!%!%!%!

“गंगा तेरा पानी अमृत झर झर बहता जाय, युग युग से इस देश की धरती तुझसे जीवन पाये, गंगा तेरा पानी….”मशहूर गीतकार साहिर ने जब 46 साल पहले 1970 में यह गीत लिखा था तब वास्तव में गंगा ऐसी ही थी। लेकिन आज गंगा इतनी विचलित है कि उसके अस्तित्व पर ही सवाल खडा हो गया है। ऐसे हालात कुछ दिनों में नहीं बने बल्कि पिछले तीन दशकों में यह हालत बने हैं जब गंगा को बचाने के लिए आन्दोलन छेडा गया। मैली और प्रदूषित गंगा नदी को साफ करने के लिए समय समय पर कई कार्यक्रम और योजनाएं चली। केंद्र सरकार ने 1984 में गंगा सफाई की एक व्यापक कार्ययोजना बनाई। इसके लिए आठ हजार करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया। लेकिन भ्रष्टाचार के कारण सभी कार्यक्रम असफल साबित हुए और पता ही नहीं चला कि वे बीच में कब बन्द हो गये। हालांकि कुछ गैर सरकारी संगठनों के सफाई अभियान चलते रहे लेकिन संसाधनों और अर्थाभाव के कारण वे भी अपेक्षित परिणाम नहीं दे सके। नतीजा गंगा मैली होती गई और गंगा सफाई के नाम पर राजनीति तेज होती गई।

गंगा मैया की गंदगी के प्रति सहानुभूति तो कईयों ने जताई लेकिन ठोस कदम किसी ने नहीं उठाए। यहाँ तक कि जिन राज्यों से गंगा गुजरती है उन्होंने भी कुछ खास नहीं किया और गंगा सफाई के लिए केन्द्र सरकार की तरफ ताकते रहे। हां, चुनावों में जरूर मैली गंगा और उसकी सफाई का मुद्दा जोरशोर से उठाया जाता और सरकार बनाने के बाद सत्ताधारी दल इस मुद्दे को भूल जाते। कहते हैं न कि ऊपर वाले के यहाँ देर है अंधेरे नहीं। आखिर 2014 में वह दिन आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्मल गंगा के चुनावी वायदे को न सिर्फ याद रखा बल्कि उसे अमली जामा पहनाने की दिशा में ठोस काम शुरू किया। प्रधानमंत्री ने सबसे पहला और बड़ा काम यह किया कि निर्मल गंगा के लिए अलग से एक मंत्रालय बनाया जिसका नाम दिया गया- जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण। पहले गंगा सफाई अभियान की जिम्मेदारी वन तथा पर्यावरण मंत्रालय की थी। नये मंत्रालय के तहत भारत सरकार ने जून 2014 में “नमामि गंगे कार्यक्रम” को मंजूरी दे कर अपने इरादे स्पष्ट कर दिए। समग्र संरक्षण मिशन के इस कार्यक्रम के लिए बीस हजार करोड़ रुपये का भारी भरकम बजटीय प्रावधान भी कर दिया।
लेकिन मंत्रालय के आंकड़ों से यह बात सामने आई है कि पिछले तीन साल में गंगा को साफ करने की 184 परियोजनाओं में से केवल 46 ही पूरी हो सकी है और नदियों को जोड़ने की 31 परियोजनाओं में से एक पर भी काम शुरू नहीं हो पाया है। जब केंद्रीय राज्य मंत्री जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण अर्जुन राम मेघवाल से मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी नमामि गंगे एवं नदी जोड़ परियोजनाओं पर काम बेहद धीमी रफ्तार से चलने के बारे में पूछा गया तो केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा है कि नदी जोड़ो परियोजना सरकार की प्रतिबद्धता है और तीन महीने में केन बेतवा लिंक समेत इनमें से कुछ परियोजनाओं का काम धरातल पर दिखने लगेगा। उन्होंने जोर दिया कि गंगा की स्वच्छता के कार्यक्रम को जनसहभागिता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है, जबकि केन बेतवा समेत तीन नदी जोड़ो परियोजनाओं की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद संबंधित राज्यों के साथ चर्चा हो रही है।
मेघवाल ने ‘‘भाषा’’ से बातचीत में कहा कि इन परियोजनाओं पर कार्य जारी है और सरकार की प्रतिबद्धता में कोई कमी नहीं आई है।उन्होंने कहा, ‘‘नदी जोड़ के तहत 31 परियोजनाएं हैं। इनमें से 5 परियोजनाएं जो हमारे लिये प्राथमिकता की सूची में हैं उनकी सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। एक दो विषय अंतर राज्य विवाद से जुड़े हैं. हाल ही में संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की गई है। जल्द ही इनका समाधान निकाल लिया जायेगा। ’’ मेघवाल ने कहा, ‘‘इनमें से तीन परियोजनाओं पर 3 महीने में काम धरातल पर दिखने लगेगा। ’’ मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिन तीन नदियों को जोड़ने का कार्य किया जाएगा, उनमें केन-बेतवा नदी जोड़ परियोजना, दमनगंगा- पिंजाल संपर्क परियोजना तथा पार-तापी-नर्मदा संपर्क परियोजना शामिल हैं।

केन बेतवा नदी जोड़ परियोजना के तहत पर्यावरण, वन्यजीव समेत सभी मंजूरी प्राप्त हो गई है हालांकि मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बीच कुछ अंतर राज्य विषय से जुड़े मुद्दों को सुलझाना है। नमामि गंगे परियोजना के तहत कार्यक्रमों की धीमी रफ्तार के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने कहा कि कई चीजें साथ साथ चल रही है. परियोजनाओं को ठीक ढंग से और पारदर्शिता के साथ पूरा करने के लिये उचित निविदा प्रक्रिया पूरा करना जरूरी है।

इससे तकनीकी एवं वित्तीय पहलु जुड़े होते हैं। अनेक परियोजनाओं के संबंध में निविदा प्रक्रिया अंतिम चरण में हैं। मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि पिछले तीन वर्षो में 5 राज्यों उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में 123 नये घाटों का निर्माण किया गया है, साथ ही 65 नये श्मशान गृहों का भी निर्माण हुआ है। मेघवाल ने कहा कि गंगा की सफाई सुनिश्चित करने के लिये धन की कोई कमी नहीं है। लेकिन यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि सतत रूप से नदी की साफ सफाई सुनिश्चित की जाए। इस उद्देश्य के लिये मंत्रालय ने जल क्रांति अभियान शुरू किया है जिसके तहत गंगा गांव, जल मित्र और महिला मित्रों को जोड़ा जा रहा है। हम जनभागीदारी को बढ़ावा दे रहे हैं।

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन :एनएमसीजी: के आंकड़ों के मुताबिक, 2011..12 के बाद से 4321.05 करोड़ रूपये जारी हुए हैं जिनमें से केवल 1963.18 करोड़ रूपये खर्च हुए। 2011..12 में 192.5 करोड़ रूपये जारी हुए और केवल 53.44 करोड़ रूपये खर्च हुए। 2012..13 में 191.52 करोड़ रूपये जारी हुए और 135.25 करोड़ रूपये खर्च हुए जबकि 2013..14 में 303.95 करोड़ रूपये जारी हुए और 266 करोड़ रूपये खर्च हुए। इसी प्रकार 2014-15 में 326 करोड़ रूपये जारी हुए और 170.99 करोड़ रूपये खर्च किये गये। 2015-16 में 1632 करोड़ रूपये जारी हुए और 602 करोड़ रूपये खर्च हुए जबकि 2016-17 में 1675 करोड़ रूपये जारी हुए और 774 करोड़ रूपये खर्च हुए।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2014-15 से 2016-17 के दौरान तीन वर्षो में एनएमसीजी को 3633 करोड़ रूपये जारी किये गए जिनमें 1547 करोड़ रूपये खर्च किये गए। गंगा नदी से जुड़े राज्यों में 2137.08 एमएलडी जलमल शोधन की क्षमता पैदा की जानी है। इसके लिए गंगा और सहायक नदियों पर 86 परियोजनाएं स्वीकृत हैं जिनमें से 30 सितंबर तक 35 परियोजनाएं पूरी की जा सकीं।

जल संसाधन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, गंगा की सफाई की 184 परियोजनाओं में से 46 परियोजनाएं पूरी हो गई हैं। वहीं 23 परियोजाएं 2017-18 में, 37 परियोजनाएं 2018-19 में, 21 परियोजनाएं 2019-20 में और 13 परियोजनाएं 2020-21 में पूरी होने की बात कही गई है। जून 2017 तक नमामि गंगे परियोजना के तहत 3234 गांव को खुले में शौच से मुक्त बनाया गया है और शौचालयों का निर्माण किया गया है।

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