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मैंने जो सच बोला आज उसका पुरस्कार दंड स्वरूप मुझे दिया गया: कुमार विश्वास

आम आदमी पार्टी द्वारा राज्यसभा उम्मीदवारों की घोषणा किए जाने पर पार्टी नेता कुमार विश्वास ने तंज़ कसा है.

पिछले डेढ़ वर्ष से हमारी पार्टी में पीएसी के अंदर शीर्ष नेतृत्व हमारे नेता और हमारे मित्र अरविंद भाई के कई निर्णय चाहे वो सर्जिकल स्ट्राइक के हों, आंतरिक भ्रष्टाचार से आंख फेरना हो, चाहे पंजाब में अतिवादियों के प्रति सॉफ्ट रहना हो, चाहे टिकट वितरणों में जो गड़बड़ियां मिलीं उसकी शिकायत हो, कार्यकर्ता हो चाहे सैनिकों की उपेक्षा हो, चाहे जेएनयू का विषय हो. मैंने जो सच बोला आज उसका पुरस्कार दंड स्वरूप मुझे दिया गया जिसके लिए मैं स्वयं का आभार व्यक्त करता हूं.

मैं मानता हूं कि नैतिक रूप से यह एक कवि की, एक मित्र की, एक सच्चे आंदोलनकारी और क्रांतिकारी की जीत है.

साथ ही मैं पिछले 40 वर्ष से मनीष के साथ काम कर रहे, 12 वर्ष से अरविंद के साथ काम कर रहे, सात साल से कार्यकर्ताओं के लिए काम कर रहे और पांच साल से लगातार आम आदमी पार्टी के हर विधायक के लिए रैलियां कर करके, ट्वीट कर करके, मीडिया में बहस कर करके जिन्होंने आज पार्टी को खड़ा किया है. ऐसे महान क्रांतिकारी श्री सुशील गुप्ता जी को आंदोलनकारियों की आवाज राज्यसभा में भेजने के लिए अरविंद जी ने चुना है. इसके लिए मैं अरविंद जी को बधाई देता हूं कि उन्होंने क्या शानदार चयन किया है. कार्यकर्ताओं को लाखों-लाखों बधाई. आपकी बात सुनी गई. एक महानतम व्यक्ति को बधाई जिसने लगातार काम किया.

ऐसे ही दूसरे गुप्ता जी को भी बधाई. इसके लिए भी कार्यकर्ताओं को बधाई.

एक दूसरी बधाई भी देना चाहता हूं. चार महीने पहले अरविंद ने मुझे मुस्कुराते हुए कहा था कि ‘सर जी आपको मारेंगे पर शहीद नहीं होने देंगे.’ मैं उनको बधाई देता हूं कि मैं अपनी शहादत स्वीकार करता हूं. वैसे युद्ध का एक नियम होता है मैं आपका भाई हूं, दोस्त हूं कि शहीदों के शव के साथ छेड़छाड़ नहीं की जाती है.

मैं जानता हूं कि आपकी (केजरीवाल) इच्छा के बिना हमारे दल में कुछ होता नहीं, आपसे असहमत रह के वहां जीवित रहना मुश्किल है. मैं अनुरोध करता हूं कृपया अपने मंत्रियों, ट्विटर के योद्धाओं को लोगों को ये कह दें कि शहीद तो कर दिया पर शव के साथ छेड़छाड़ न करें क्योंकि यह युद्ध के नियमों के विपरीत है. आगे से ऐसी कोई दुर्गंध न फैले. मैं देश भर में जो करोड़ो शुभचिंतक और लाखों कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करता हूं.

और उनसे कहना चाहता हूं कि सबको लड़ने ही पड़े अपने-अपने युद्ध, चाहे राजा राम हो चाहे गौतम बुद्ध.

मैं बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं इन दोनों क्रांतिकारियों को जिनको चुनकर, रामलीला मैदान की लड़ाई का प्रतिफल और निष्कर्ष नवनीत बनाकर सर्वोच्च सदन में भेजा गया है, जहां अटल जी और इंदिरा जी जैसे महनीय लोगों की आवाज गूंजी है. मैं अरविंद को और पार्टी के उन लोगों को बधाई देता हूं जिन्होंने इन्हें चुना है.

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