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यूपी में योगी के बाद,उत्तराखंड में अब त्रिवेंद्र सिंह की परीक्षा

देहरादून। उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव में भाजपा को मिली जोरदार जीत ने मुख्यमंत्री योगी को मुस्कुराने का मौका दिया है वही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के समक्ष दिलचस्प चुनौती पेश कर दी है। मार्च में रिकार्ड बहुमत से सत्ता हासिल करने वाली भाजपा पर अब आगामी निकाय चुनाव में बेहतर नतीजे देने का दबाव रहेगा। ठीक उत्तर प्रदेश की ही तर्ज पर उत्तराखंड में भी मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के लिए यह सत्ता संभालने के बाद पहली अग्निपरीक्षा होगी।

उत्तराखंड में लगभग चार महीने बाद, अप्रैल 2018 में नगर निकाय चुनाव होने हैं। प्रदेश की भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के लिए एक साल के कार्यकाल के नतीजों को जनमत के आधार पर आंकने का अवसर बनने जा रहा है।

उत्तराखंड में यूं तो नगर निकायों की कुल संख्या 92 है, लेकिन इनमें नगर निगम केवल आठ ही हैं। नगर पालिकाओं की संख्या 35 और बाकी 49 नगर पंचायत हैं। अगर प्रदेश की भाजपा सरकार के आठ माह के कामकाज का आंकलन का आधार केवल नगर निगमों को ही बनाएं तो भाजपा को इस निकाय चुनाव में आठ नगर निगमों पर काबिज होने के लिए सियासी जंग लड़नी होगी।

भाजपा को आगामी निकाय चुनाव में अपने पुराने प्रदर्शन को दोहराना होगा। इस बार दो नए निगम (कोटद्वार व ऋषिकेश) बनने से भाजपा की मेहनत और ज्यादा बढ़ गई है। साफ है कि यह भाजपा के लिए संतोष की बात है कि पांच सिटिंग महापौर उसके हैं, लेकिन देखा जाए तो यह बड़ी चुनौती भी रहेगी कि पार्टी आगामी निकाय चुनाव में अपनी सीटों को बचा ले जाए।

हालांकि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत पूरी तरह आश्वस्त हैं कि उत्तराखंड में कुछ समय बाद होने वाले निकाय चुनाव में भी भाजपा विधानसभा चुनाव के प्रदर्शन को दोहराएगी ।

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