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फिलीपींस दौरे पर डोनाल्ड ट्रम्प से मिलेंगे नरेंद्र मोदी

फिलीपींस की राजधानी में सोमवार को ASEAN का इनॉगरेशन हुआ। इसमें नरेंद्र मोदी, डोनाल्ड ट्रम्प समेत कई साउथ-ईस्ट एशियन देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल हुए।आपको बता दे कि ASEAN का फुल फॉर्म (Association of Southeast Asian Nations) है।इसके बाद मोदी ने मनीला के इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट का दौरा किया। यहां उन्होंने खेती भी की। आज मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प के बीच ऑफिशियल मुलाकात होनी है। मीटिंग में इंडो-पैसिफिक रीजन में सिक्युरिटी इश्यूज को लेकर बातचीत की उम्मीद है। फिलीपींस में हो रहे 31st ASEAN समिट में हिस्सा लेने के लिए चीन के प्रीमियर ली केकियांग, जापान के पीएम शिंजो आबे, रूस के पीएम दिमित्री मेदवेदेव, मलेशिया के प्राइम मिनिस्टर नजीब रज्जाक भी पहुंचे हैं ।आसियान की इनॉगरल सेरेमनी में रामायण का मंचन हुआ। ये इसलिए खास है कि क्योंकि किसी इंटरनेशनल समिट में पहली बार रामायण का मंचन किया गया।आपको बता दें कि थाईलैंड, कंबोडिया, फिलीपींस समेत कई साउथ-ईस्ट देशों में रामायण का अपने-अपने अंदाज में मंचन किया जाता है।

4 महीने में ट्रम्प से मोदी की दूसरी मुलाकात

– रविवार को ट्रम्प और मोदी के बीच एक छोटी सी मुलाकात हुई थी। चार महीने में ये दूसरी मुलाकात थी। इससे पहले वे जुलाई में जर्मनी में हुई जी20 समिट में मिले थे।
– बता दें कि नवंबर में ही ट्रम्प की बेटी इवांका ट्रम्प भी भारत में 28 से 30 नवंबर तक चलने वाली ग्लोबल एंटरप्रेन्योरशिप समिट में हिस्सा लेंगी। मोदी जून में जब अमेरिका दौरे पर गए थे, तब उन्होंने इवांका को भारत आने का न्योता दिया था।
– बता दें कि मोदी फिलीपींस के 3 दिन के दौरे पर वे रविवार को यहां पहुंचे थे। उन्होंने गाला डिनर में हिस्सा लिया। मोदी ने फिलीपींस की ट्रेडिशनल ड्रेस भी पहनी थी।

ASEAN के दौरान क्वाड्रीलेटरल (चतुष्पक्षीय) गठबंधन के प्रस्ताव को लेकर यूएस, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत के ऑफिशियल्स के बीच रविवार को मीटिंग हुई। माना जा रहा है कि इस मीटिंग में इंडो-पैसिफिक रीजन में चीन के बढ़ते सैन्य प्रभाव पर चिंता जाहिर की गई।
– भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा, “चर्चा सभी के मिलेजुले नजरिए, शांति, स्थायित्व और खुशहाली को बढ़ाने और एक-दूसरे से संबंधों पर केंद्रित थी। सभी इस बात पर राजी हैं कि स्वतंत्र, खुले, खुशहाल और एकजुट इंडो-पैसेफिक रीजन के जरिए ही सभी देशों और पूरी दुनिया को लंबे समय तक फायदा होगा। इसमें अमेरिका, रूस, भारत, चीन, जापान और नॉर्थ कोरिया समेत एशिया रीजनल फोरम (एआरएफ) के 23 मेंबर हैं।
– यह ऑर्गनाइजेशन 8 अगस्त 1969 को थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में बनाया गया था।
– इसके फाउंडर मेंबर थाईलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलिपींस और सिंगापुर थे।
– 1994 में आसियान ने एआरएफ बनाया, जिसका मकसद सिक्युरिटी को बढ़ावा देना था।

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