माफिया डॉन अबू सलेम को सताने लगा अपनी पुश्तैनी जमीन पर कब्जा होने का डर

माफिया डॉन अबू सलेम को अपनी पुश्तैनी जमीन पर कब्जा होने का डर सताने लगा है। अबू सलेम ने जेल से आजमगढ़ के सरायमीर थाना पुलिस को पत्र लिख कर पुलिस से मामले में हस्तक्षेप करने और न्याय दिलाने की मांग की है। अपने प्रार्थना पत्र में अबू सलेम ने लिखा है कि ‘नकल खतौनी की प्रति दिनांक 30 मार्च 2013 को परिवार वालों ने लिया था, उस समय मेरा व मेरे भाइयों का नाम दर्ज था।

आज़मगढ़ पुलिस में दी गई शिकायत में अबू सलेम ने बताया है कि अभी हाल में परिवार के लोगों ने खतौनी की दूसरी नकल निकाली तो पता चला कि उक्त भू-खंड आराजी पर मोहम्मद नफीस, मोम्मद शौकत, सरवरी, मोहिउद्दीन, एखलाक और नदीम अख्तर का नाम दर्ज हो गया है।

सलेम ने आरोप लगाया है कि उक्त लोग जालसाजी करके उसकी जमीन को हड़पना चाहते हैं। पत्र में उन्होंने मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है। मौजूदा वक्त में सरायमीर बाजार में स्थित इस जमीन पर माल का निर्माण चल रहा है। शिकायती पत्र मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंच कर स्थिति का जायजा लिया। दोनों पक्षों को बुलाकर पूरी स्थिति जानने का प्रयास किया है।

इस मामले में अबू सलेम के वकील राजेश सिंह ने बताया कि सलेम ने मुंबई के सेंट्रल जेल से खुद की ज़मीन कब्ज़ा होने के संबंध में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, आजमगढ़ जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह, एसपी आजमगढ़ और थानाध्यक्ष सरायमीर को पोस्ट के माध्यम से प्रार्थना पत्र सौंपा है।

अबू सलेम के वकील का यह भी कहना है कि अगर जल्द कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई तो 156 के तहत आरोपियों के खिलाफ कोर्ट की मदद से मुकदमा दर्ज़ की जाएगी। वहीं, पूरे मामले में आजमगढ़ पुलिस अभी कुछ भी कहने से बचती नज़र आ रही है।

बता दें, तिहाड़ जेल में बंद अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम का जन्म 1960 के दशक में उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में सराय मीर गांव में हुआ था। पिता की मौत के बाद अबू सलेम ने आजमगढ़ में ही एक मैकेनिक के यहां काम करना शुरू कर दिया। लेकिन जल्द वह काम के लिए दिल्ली आ गया, जहां उसने मैकेनिक का काम करने के बाद टैक्सी चलाना शुरू किया।

लेकिन वह अपना और परिवार का गुजारा नहीं कर पा रहा था। इसलिए 80 के दशक में उसने मुंबई का रुख कर लिया, जहां वह टैक्सी चलाने लगा, लेकिन कुछ माह बाद मुंबई में अबू सलेम की मुलाकात अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम के लोगों से हुई, जो जुर्म की दुनिया में उसका पहला कदम था।

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