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उन्नाव गैंगरेप केस: सीबीआई की हिरासत में कुलदीप सिंह सेंगर,माखी थाने के एसओ को गिरफ्तार कर सकती है CBI

उन्नाव गैंगरेप की पीड़िता का बयान लेने के लिए सीबीआई की दस सदस्यीय टीम शुक्रवार सुबह 10 बजे उन्नाव के उस होटल में पहुंची जहां पीड़ित परिवार को प्रशासन ने ठहराया है। होटल में पीड़िता और उसके परिवार के बयान लिए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि पीड़िता के पिता को जेल भेजने के आरोप में पुलिस माखी थाना के एसओ को गिरफ्तार कर सकती है। बता दें कि विधायक के भाई अतुल सिंह द्वारा पीड़िता के पिता की पिटाई के बाद पुलिस ने शिकायतकर्ता को ही जेल में डाल दिया था।

 इससे पहले सीबीआई ने विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को उसके लखनऊ स्थित इंदिरानगर आवास से शुक्रवार सुबह करीब 5 बजे गिरफ्तार कर लिया था। उससे पूछताछ की जा रही है। उसे आज कोर्ट में पेश किया जा सकता है। विधायक पर पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

दरअसल, सीबीआई की लखनऊ इकाई ने गुरुवार देर रात आरोपी विधायक सेंगर के खिलाफ तीन केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। वहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट भी आज मामले में अपना फैसला सुना सकता है।

विधायक के खिलाफ एसआईटी द्वारा दर्ज कराए गए रेप के केस के साथ ही विधायक के भाई अतुल सिंह द्वारा पीड़िता के पिता के साथ मारपीट और जेल में उनकी मौत का मामला शामिल है। सीबीआई एसपी राघवेंद्र वत्स ने यूपी पुलिस से संबंधित कागजात ले लिए हैं।

पीड़िता को मुकम्मल सुरक्षा
विधायक की गिरफ्तारी न होने से जांच प्रभावित होने से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए डीजीपी ने कहा कि पीड़िता और उसके परिवार को मुकम्मल सुरक्षा उपलब्ध करा दी गई है। न तो उस पर कोई दबाव डाल सकता है, न ही कोई जांच प्रभावित कर सकता है।

 

हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी

 रेप कांड में पुलिस की ढिलाई और अभियुक्तों को बचाने की कोशिश पर तल्ख टिप्पणी करते हुए बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले से साफ है कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया है, जिसे आज दोपहर दो बजे सुनाया जाएगा।

प्रदेश सरकार ने सफाई दी कि आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ सबूत मिलने पर ही कार्रवाई की जाएगी। अदालत के इस सवाल पर कि सरकार विधायक को गिरफ्तार करना चाहती है या नहीं, महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने कहा कि वह इस बारे में कोई बयान नहीं दे सकते हैं। यदि अदालत कोई आदेश देती है तो सरकार कार्रवाई करेगी।

मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की पीठ ने कहा कि पीड़िता ने 17 अगस्त को शिकायत दर्ज कराई थी कि 4 जून को विधायक और तीन लोगों ने उसके साथ रेप किया, लेकिन उसकी एफआईआर दर्ज नहीं की गई। एसआईटी रिपोर्ट के बाद विधायक पर प्राथमिकी दर्ज हुई। इससे पहले पीड़िता ने बहुत कुछ खो दिया। आत्मदाह की कोशिश की, उसके पिता की हत्या हो गई। पुलिस क्या करती रही? जबकि एसआईटी रिपोर्ट में है कि पहली नजर में पीड़िता के आरोप विश्वसनीय हैं।

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