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सीबीआई जज की मौत पर दो संस्थाओं की साख लगी दाव पर

सीबीआई के विशेष जज ब्रजगोपाल लोया की मौत की परिस्थितियों को अंग्रेजी पत्रिका द कैरेवन ने संदेहास्पद बताया था, पत्रिका में मृत जज के परिजनों से बातचीत के आधार पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी. जिसके बाद कुछ रिटायर्ड जजों, वकीलों और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित कई नेताओं ने लोया की मौत की जाँच कराने की माँग की थी। और सोसल मीडिया पर भी चर्चा का विशय बन गया था। कुछ लोग खुलकर बोल रहे है तो कुछ डर के मारे इषारों में ही बात कर पा रहे है।
लेकिन ताजा मामला अब अंग्रेजी दैनिक इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट ने द कैरेवन की रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं. लोया की मौत एक दिसंबर की सुबह नागपुर में हुई थी जहाँ वे एक शादी में शामिल होने गए थे, उनकी मौत की वजह दिल का दौरा पड़ना बताई गई है.। उक्त रिपोर्ट के बाद देषभर में लोया की मौत एक मुददा भी है और एक रहस्य भी। कुछ लोग खुलकर सवाल कर रहे हैं तो कुछ लोगों और मीडिया संस्थानों की समझ में ही नही आ रहा है कि क्या किसी जज की मौत पर खुलकर लीखा जा सकता है या नहीं। जिसके बाद से कई प्रकार के सवाल खडे हो गये है। उधर कानून के जानकार भी इस मुददे पर चुप है, चुप्पी का राज हर कोई जानता है। इस लिए उस राजसे कोई पर्दा हटाना नही चाहता है, लेकिन ताजा घटना क्रम में दो मीडिया संस्थानों के कूद जाने से मामला और भी गंभीर हो गया है। पाठक की समझ में नहीं आ रहा है कि विष्वास किस संस्थान पर किया जाए, लेकिन इन सब के बीच एक बात तो साफ हो गयी है कि उक्त दोनों संस्थाओं की साख भी दावपर है।

 

सोशल मीडिया पर जज लोया की मौत की चर्चा और रहस्य की बात

पत्रिका द कैरेवन की रिपोर्ट में कहा गया था कि जज लोया को ऑटो रिक्शा में अस्पताल ले जाया गया था, इसके अलावा लोया की बहन ने सवाल उठाया था कि दिल का दौरा पड़ने की हालत में उनका ईसीजी क्यों नहीं किया गया?
इंडियन एक्सप्रेस ने एक ईसीजी रिपोर्ट भी छापी है, दांडे अस्पताल के प्रबंधकों ने भी अखबार को बताया है कि जज लोया का ईसीजी टेस्ट किया गया था, लेकिन उक्त ईसीजी टेस्ट की डेट पर ही पत्रिका द कैरेवन ने सवाल खडे कर दिये है।
वहीं ताजा मामला तब और सुखियों में आ गया है जब मगर द कैरेवन के राजनीतिक मामलों के संपादक हरतोष सिंह बल ने ट्विट करके कहा है कि अभी तक के लिए तो इतना ही नोट करना काफी है कि इंडियन एक्सप्रेस ने जो ईसीजी रिपोर्ट छापी है और जिसका हवाला एनडीटीवी ने दिया है, उस पर तारीख 30 नवंबर की है, जो जज लोया की मौत से एक दिन पहले की है।

अंग्रेजी दैनिक इंडियन एक्सप्रेस ने द कैरेवन की रिपोर्ट में किए गए दावों पर सवाल उठाए हैं, अखबार ने मुंबई हाई कोर्ट के दो जजों–जस्टिस भूषण गवई और जस्टिस सुनील शुकरे–से बातचीत की है, इन दोनों का कहना है कि वे जज लोया की मौत के समय अस्पताल में मौजूद थे.

लातूर बार एसोसिएशन का प्रदर्शन

इंडियन एक्सप्रेस का कहना है कि दोनों जजों ने माना है कि लोया की मौत की परिस्थितियों में ऐसा कुछ नहीं था जिस पर शक किया जा सके। अखबार का दावा है कि जस्टिस शुकरे ने कहा, उन्हें ऑटो रिक्शा से अस्पताल ले जाने का सवाल ही नहीं है, जज बरडे उन्हें अपनी कार में दांडे हॉस्पिटल ले गए थे.कैरेवन की रिपोर्ट में कहा गया था कि उन्हें ऑटो से अस्पताल ले जाया गया था।
इस बीच, जज लोया के गृह नगर लातूर के बार एसोसिएशन ने मामले की जाँच की माँग करते हुए मंगलवार से प्रदर्शन करने की घोषणा की है.
गौरतलब हो कि जज लोया अपनी मौत से पहले सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ केस की सुनवाई कर रहे थे जिसमें भाजपा के मौजूदा अध्यक्ष अमित शाह अभियुक्त थे, लोया के बाद आने वाले सीबीआई जज ने अमित शाह को बरी कर दिया था। उक्त मामले को भी लोग संदेह से देख रहे है। जिसके बाद से साफ हो गया कि दोनों संस्थाओं द्वारा किये गये दावो में कितना दम है, या फिर सच्चाई कुछ और ही है।

One thought on “सीबीआई जज की मौत पर दो संस्थाओं की साख लगी दाव पर

  1. आप की संपादकीय टीम का बहुत बहुत आभार करना चाहता हूॅ। आप ने दोनों संस्थाओं की खबर से देष के लोगों का ध्यान भी खीचा और जानकारी भी दी है। मेरी समझ में भी नहीं आ रहा था कि जब जज की मौत में रहस्य है तो कोई कुछ बोल क्यों नहीं रहा है। हमे उम्मीद है कि आप आगे का भी अपडेट आॅनलाइन पाठकों को देंगे।
    धन्यवाद।

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