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सीबीआई के लिए आसान नहीं होगी गोमती रिवर फ्रंट की जांच

अखिलेश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट गोमती रिवर फ्रंट के निर्माण में हुए घोटाले की जांच सीबीआई ने शुरू तो कर दी है। लेकिन घोटालों के असली गुनहगारों तक पहुंचना सीबीआई के लिए आसान नहीं होगा। इस प्रॉजेक्ट के लिए 800 से ज्यादा टेंडर हुए हैं। इन सभी की जांच सीबीआई को करनी होगी। गोमती रिवर फ्रंट के निर्माण में गड़बड़ियों की भरमार है। परियोजना का बजट छह से आठ गुना तक बढ़ गया था।

अधिकारी और मंत्री परियोजना के नाम पर स्वीडन, जापान, चीन, जर्मनी, मलेशिया, सिंगापुर, साउथ कोरिया और ऑस्ट्रिया घूमते रहे लेकिन अमल के नाम पर कुछ नहीं हुआ। सीबीआई को इन सब की जांच भी करनी होगी। वहीं गोमती रिवर फ्रंट के निर्माण के दौरान इंजीनियरों ने अफसरों की शह पर जमकर ‌फर्जीवाड़े किए। एक काम को दो-दो जगह होना दिखाया गया।

कागजों में 31 काम का जिक्र है, लेकिन 24 काम ही वास्तविक मिले हैं। सीबीआई की पड़ताल में तत्कालीन सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव, तत्कालीन मुख्य सचिव आलोक रंजन, प्रमुख सचिव वित्त और बाद में मुख्य सचिव रहे राहुल भटनागर, प्रमुख सचिव सिंचाई दीपक सिंघल का नाम प्रमुखता से शामिल है। बता दें की सीएम योगी ने सत्ता संभालने के बाद रिवर फ्रंट घोटाले की जांच के आदेश दे दिए थे। जिसके बाद सीबीआई ने रिवर फ्रंट घोटाले के जांच की कमान अपने हाथों में ली थी। अब देखना दिलचस्प होगा कि सीबीआई के फंदे में असली गुनहगार कब आते हैं।

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