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आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे की गुणवत्ता को क्लीन चिट

लखनऊ। अखिलेश यादव सरकार के ड्रीम प्रोजेक्टों में शुमार 302 किलोमीटर लंबे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे का शुभारम्भ नवंबर 2016 में हुआ था। उस समय वायुसेना ने लड़ाकू विमान मिराज-2000 और सुखोई की इस मार्ग पर टच लैडिंग कराई थी। अखिलेश यादव ने इस मार्ग को विकास के मॉडल के रूप में जनता के सामने रखा था। लेकिन उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए जमीन अधिग्रहण में धांधली का आरोप लगाया था। साथ ही ये भी कहा जा रहा था कि सपा के करीबियों और सरकार में रसूख रखने वाले अधिकारियों ने खूब मलाई मारी थी।

प्रदेश की सत्ता में जैसे ही बीजेपी आई..तो यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने 302 किमी लंबे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे की जांच के आदेश दे दिए। वहीं परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई जमीन के मालिकों के बारे में पड़ताल कराई गई। एक साल पहले के बैनामा निकलवाए गए। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के 160 बैनामों की जांच में कोई गड़बड़ी नहीं मिली। इसकी रिपोर्ट प्रशासन ने उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण को सौंपी है।

दो महीने की जांच के बाद रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्वे यानी राइट्स ने कहा है कि सबकुछ मानक के अनुरूप है। एक्सप्रेस-वे को कई जगहों से खोदकर निर्माण सामग्री के नमूने की जांच कराई गई… करीब दो महीने चली जांच के बाद राइट्स ने गुणवत्ता को निर्धारित मानक के अनुरूप बताते हुए क्लीन चिट दे दी…. हालांकि सीसीटीवी कैमरे समेत कई काम को अधूरा पाया गया। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे को गुणवत्ता जांच कमेटी से क्लीन चिट मिलने के बाद अखिलेश यादव का चेहरा जहां खिल गया है.. वहीं एक बार फिर बीजेपी की किरकिरी हो गई। ऐसे में एक बात तो तय है कि आने वाले लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव अपनी इस टैग लाइन काम बोलता है को दोबारा हथियार बना सकते हैं।

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