Thu. Feb 21st, 2019

उत्तराखंड: देहरादून में बादल फटने से तबाही, इन छह जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी

राजधानी देहरादून के सीमाद्वार क्षेत्र में बादल फट गया। इससे क्षेत्र में भारी तबाही हुई। एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई जबकि दो घायल हो गए।

आज भी भारी बारिश की आशंका
मौसम विभाग ने आज भी कुमाऊं के लगभग सभी और गढ़वाल के दो जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका जताई है।

मौसम केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि आज भी पिथौरागढ़, बागेश्वर, चंपावत, नैनीताल, चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। भारी बारिश के अनुमान को देखते अलर्ट जारी करने के साथ ही प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतने की हिदायत दी गई है।
 

देखते ही देखते कुछ इलाकों में मूसलाधार बारिश होने लगी

मौसम विभाग के मुताबिक इस क्षेत्र में बादल फटा है

मौसम विभाग के मुताबिक इस क्षेत्र में बादल फटा है
राजधानी में बुधवार की तड़के तीन बजे से हल्की बारिश शुरू हुई। देखते ही देखते कुछ इलाकों में मूसलाधार बारिश होने लगी। घंटाघर से लेकर प्रेमनगर तक के क्षेत्र में बारिश ज्यादा तेज थी। सीमाद्वार में एक घंटे में दस सेंटीमीटर (100 मिमी) बारिश रिकॉर्ड की गई। मौसम विभाग के मुताबिक इस क्षेत्र में बादल फटा है, जिससे भारी तबाही हुई।

क्षेत्र में शास्त्रीनगर खाला के निकट स्थित एक मकान का पुश्ता ढह गया, जिसमें परिवार के छह सदस्य दब गए। इनमें से चार की मौके पर ही मौत हो गई जबकि दो गंभीर रूप से घायल हो गए। सीमाद्वार इलाके की ही हिल व्यू कालोनी में भी नाला उफान पर आ गया, जिसका पानी दीवार तोड़कर एशियन स्कूल में घुस गया। यहां से होते हुए पानी ने पूरी कालोनी में भारी तबाही मचाई। गाड़ियां नाव की तरह पानी में तैरने लगीं। 

भारी बारिश से हुई तबाही को देखते हुए सुबह करीब 7 बजे जिलाधिकारी एसए मुरुगेशन ने 12वीं तक के सभी स्कूलों में एक दिन का अवकाश घोषित कर दिया। मौसम विभाग के निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि सीमाद्वार क्षेत्र में बादल फटने की वजह से एक घंटे के भीतर दस सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है।

क्या होता है बादल फटना

बादल फटने पर होने वाली बारिश तबाही लेकर आती है

बादल फटने पर होने वाली बारिश तबाही लेकर आती है
किसी क्षेत्र में एक घंटे के भीतर 10 सेंटीमीटर यानी 100 मिमी. बारिश हो जाती है तो उसे बादल फटना कहा जाता है। मौसम विभाग के निदेशक बिक्रम सिंह के मुताबिक बादल फटने पर होने वाली बारिश तबाही लेकर आती है।

पिछले वर्ष घंटाघर पर फटा था बादल
बादल फटने की हाल के वर्षों में यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले गत वर्ष घंटाघर पर एक घंटे में 10 सेंटीमीटर से भी ज्यादा बारिश हुई थी। घंटाघर के आसपास के क्षेत्र इससे जलमग्न हो गए थे।

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