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उत्तराखण्ड नर्सिस सर्विसिस एसोसिएशन की कार्यकारिणी पर विवाद ,अध्यक्ष पद पर दो अध्यक्ष ने ठोका दावा

देहरादून । उत्तराखण्ड नर्सिस सर्विसिस एसोसिएशन की कार्यकारिणी पर विवाद शुरू हो गया है। नर्सिस यूनियन तो एक ही है लेकिन इसमें दो-दो नर्स अध्यक्ष होने का दावा कर रही हैं।

दरअसल शनिवार को नर्सेज एसोसिएशन की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया जिसके बाद से यूनियन में दो पक्ष आमने-सामने हो गए हैं और अब एक दूसरे के खिलाफ कानून की शरण में जाने की तैयारी में है।

नियमानुसार खुद को नर्सिस एसोसिएशन की अध्यक्ष बता रही कृष्णा रावत का आरोप है कि फंड की बंदरबांट करने के लिए कुछ नर्सों ने मिलकर नई अध्यक्ष का चुनाव किया है जो नियम का उल्लंघन है।

रावत के अनुसार 2016 में हुए एसोसिएशन के चुनाव में उन्हें अध्यक्ष चुना गया था और उनका कार्यकाल 2018 तक है।

कृष्णा रावत कहती हैं कि एसोसिएशन के संविधान के अनुसार सिर्फ़ अध्यक्ष को ही कार्यकारिणी की बैठक बुलाने का अधिकार है बैठक बुलाने का अधिकार है और जिस बैठक में उन्हें हटाने की बात कही जा रही है वह पूरी तरह असंवैधानिक है।

इसके उलट खुद को एसोसिएशन की नई अध्यक्ष बता रही मीनाक्षी जखमोला ने फंड की बंदरबांट के आरोपों को ग़लत बताया है और कहा कि अभी तक अकाउंट्स कृष्णा रावत के हाथ में ही हैं।

उन्होंने कहा कि कृष्णा रावत नर्सिंग सुपरिटेंडेंड हैं जो कि एक प्रशासनिक पद है. प्रशासनिक पद वाले के लिए यूं भी किसी एसोसिएशन का सदस्य होना, आंदोलन में शामिल होना संभव नहीं है. प्रदेश की सभी नर्सों की सहमति से उन्हें हटाने का फ़ैसला लिया गया है।

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