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राजकीय शिक्षक संघ के अधिवेशन से क्यो दूरी बनायी शिक्षामंत्री पांडेय ?

देहरादून। सूबे के शिक्षक संगठन से शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे की दूरियां बढ़ती ही जा रही हैं। चाहे वो डेलिगेशन के मिलने को लेकर हुई रार हो या फिर तमाम अन्य मुद्दों पर। शिक्षक संगठन का चतुर्थ अधिवेशन का आयोजिन किया गया था, जिसमें मंत्री अरविंद पांडे नदारद रहे। हालांकि, कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि सीएम रावत ने शिरकत की, जहां उन्होंने अपने संबोधन में सूबे के सरकारी स्कूलों में घट रही छात्र-छात्राओं की संख्या पर चिंता जाहिर की।

 लक्षमण विद्यालय में आयोजित राजकीय शिक्षक संघ के अधिवेशन में चर्चा का विषय शिक्षामंत्री ही रहे। हर एक शिक्षक में चर्चा रही कि आखिर शिक्षामंत्री इतने नाराज क्यों है। कुछ लोगों का मानना था कि डे्रस कोड लागू न किये जाने से नाराज है तो कुछ का मानना था कि शिक्षक मंत्री की बात न सुनकर सीधे सीएम से ही मुखातिब हो रहे हैं। वजह कुछ भी हो , लेकिन पूरे कार्यक्रम में चर्चा शिक्षामंत्री की रही। कुछ लोगों को तो शिक्षामंत्री के कार्यक्रम में न आने का डर भी सता ता रहा कि न जाने अब शिक्षामंत्री आने वाले समय में शिक्षकों के साथ क्या व्वहार करते है।

शिक्षक संघ के चतुर्थ अधिवेशन में सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने संबोधन में कहा कि यदि राज्य के सभी स्कूल धीरे-धीरे बंद हो जाएंगे तो शिक्षक कहां नौकरी करेंगे, ये बड़ा चिंता का विषय है। वहीं उन्होंने संघ की मांगों पर चुटकी लेते हुये कहा कि संगठन कुछ ऐसी मांगें करता है जो पूरी नहीं होती, तभी तो संगठन चलते हैं।

इस मौके पर उन्होंने संघ को भवन देने के लिए सरकार की तरफ से भूमि देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि स्थानान्तरण अधिनियम लाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। सीएम ने साफ किया कि नीति में जो नियम तय हैं उसी को यथावत रखा जाएगा। कुछ मांगों को मानने के लिए सीएम ने संघ को सीएम आवास में कल 12 बजे का समय दिया है और शिक्षक संगठन को बंद होते स्कूलों पर सोचने के लिए कहा है।
वहीं संघ के पदाधिकारियों ने सीएम की बात का संज्ञान लेते हुए कहा कि बंद होते स्कूल उनके लिए भी चिंताजनक हैं, लेकिन इसकी रोकथाम के लिए राज्य स्तर पर एकेडमिक सेल गठित की जाएगी, जिसको राजकीय शिक्षक संघ के माध्याम से जनपद व ब्लॉक स्तर पर पहुंचाया जाएगा ताकि घटते छात्रों की संख्या पर अंकुश लगाया जा सके और स्कूल बंद होने से रोके जा सकें।
इस मौके पर निदेशक माध्यमिक शिक्षा आरके कुंवर ने कहा कि राज्य में ऐसे 2 हजार 500 ऐसे स्कूल हैं जिनमें छात्रों की संख्या 10 से कमतर आंकी गई है, जिसको दूसरे स्कूलों में मर्ज कर दिया गया है। निदेशक की मानें तो ब्लॉक स्तर पर आदर्श स्कूलों की स्थापना की जा रही है जिसमें कमसे कम हर विषय के पांच अध्यापक हो।
बंद होते सरकारी स्कूल प्रदेश की शिक्षा वयवस्था पर सवाल तो खड़े करता ही है लेकिन उन नौजवान बेरोजगारों के लिए भी गंभीर प्रश्न है जो बेरोजगारी की लाइन में लगकर अध्यपक बनने की तलाश कर रहे हैं। यह हम इसलिए कह रहे हैं कि यदि स्कूल बंद होंग तो शिक्षा विभाग में रोजगार के सृजन बंद हो जाएंगे। ये गंभीर विषय उन शिक्षकों के लिए है जिनके स्कूल बंद हो रहे हैं, वह किस स्कूल में नौकरी करेंगे।

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