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फिच ने घटाया भारत की GDP का अनुमान, गुजरात चुनाव से पहले मोदी सरकार को झटका

नई दिल्ली। दुनिया की जानी-मानी रेटिंग एजैंसी फिच के ग्रोथ अनुमान से आर्थिक मोर्चे पर केन्द्र की मोदी सरकार को झटका लगा है। फिच ने न सिर्फ इस वित्त वर्ष के लिए भारत की जी.डी.पी. का अनुमान घटा दिया है बल्कि अगले वित्त वर्ष के ग्रोथ अनुमान में भी कटौती की है। एजैंसी के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में भारत की जी.डी.पी. 6.9 की जगह 6.7 प्रतिशत रह सकती है जबकि अगले वित्त वर्ष यानी 2018-19 में यह 7.4 की जगह 7.3 प्रतिशत रहेगी। फिच ने कहा कि जी.एस.टी. और नोटबंदी की दिक्कतों के चलते ही देश की ग्रोथ रेट कम हुई है और इन दिक्कतों से पार पाने में अभी वक्त लग सकता है।

क्यों घटाया अनुमान

फिच ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस वित्त वर्ष की जून-सितम्बर की दूसरी तिमाही में आई देश की जी.डी.पी. ग्रोथ के आंकड़े निराश करने वाले हैं। हाल ही में सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक दूसरी तिमाही में जी.डी.पी. की रफ्तार 6.3 प्रतिशत रही है जबकि अप्रैल-जून की पहली तिमाही में विकास की आर्थिक वृद्धि की यह दर 5.7 प्रतिशत थी। पिछले साल वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में देश की तरक्की की रफ्तार 7.3 प्रतिशत थी जो इस साल पिछले साल के मुकाबले एक प्रतिशत कम है। फिच को यह वृद्धि दर अनुमान से कम लग रही है लिहाजा एजैंसी ने देश की ग्रोथ का अनुमान घटा दिया है।

3 एजैंसियां, 2 की रेटिंग स्थिर

फिच के अलावा एस. एंड पी. और मूडीज ही दुनियाभर में देशों की आर्थिक स्थिति का आकलन करके अपने अनुमान जारी करती हैं। पिछले महीने मूडीज द्वारा 14 साल के बाद देश की अर्थव्यवस्था की आऊटलुक को पॉजीटिव किए जाने के बाद मोदी सरकार को राहत मिली थी लेकिन इसके बाद 25 नवम्बर को आए एस. एंड पी. के अनुमान में भारत की अर्थव्यवस्था के आऊटलुक को स्थिर रखा गया, जबकि फिच ने भी भारत का जी.डी.पी. अनुमान घटाया है। इसे भारत के लिए झटका माना जा रहा है।

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