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उत्तराखंड स्थानांतरण ऐक्ट:पहली नियुक्ति व पदोन्नति अनिवार्य रूप से दुर्गम क्षेत्रों में

देहरादून। गैरसैंण स्थित विधानसभा में गुरुवार को पारित हुए स्थानांतरण ऐक्ट के लागू होने के बाद राज्य में पहली नियुक्ति व पदोन्नति अनिवार्य रूप से दुर्गम क्षेत्रों में होगी। यह व्यवस्था पूरी तरह एक जुलाई, 2020 से प्रभावी होगी। पहली व दूसरी पदोन्नति के लिए सेवा का न्यूनतम आधा भाग दुर्गम में व्यतीत करना कार्मिकों के लिए जरूरी होगा।

बुधवार को पारित स्थानांतरण विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि स्थानांतरण ऐक्ट लागू होने की तिथि से 30 जून, 2020 तक की अवधि को संक्रमणकाल मानकर इस अवधि में प्रोन्नति की दशा में कार्मिक ने ऐसा आधा भाग दुर्गम स्थान पर व्यतीत नहीं किया गया हो तो उसे यह बॉन्ड भरना होगा कि उक्त अवधि पूरी होने तक वह अनिवार्य रूप से दुर्गम स्थान पर तैनात रहेगा। जो कार्मिक अपने सेवाकाल में दुर्गम में तैनात नहीं हो सके हैं, वह प्रोन्नति की पात्रता के लिए दुर्गम क्षेत्र में अनुरोध के आधार पर तबादले के लिए आवेदन कर सकते हैं।

ऐक्ट में दुर्गम क्षेत्र में तैनात कार्मिकों के लिए प्रोत्साहन लाभ की व्यवस्था भी की गई है। ऐसे कार्मिक सात हजार फीट से ज्यादा दुर्गम स्थान पर तैनात हैं तो वहां एक वर्ष की सेवा अवधि को दो वर्ष के सुगम स्थान की सेवा के समान माना जाएगा। सात हजार फीट से कम ऊंचाई पर स्थित दुर्गम में तैनात कार्मिक की एक वर्ष की सेवा को एक वर्ष तीन माह की सुगम स्थान की सेवा के समान माना जाएगा। समूह क के अधिकारियों के तबादलों के लिए गठित समिति की सिफारिश के आधार पर शासन तबादले करेगा, जबकि समूह-ख के अधिकारियों के स्थानांतरण समिति की सिफारिश के आधार पर विभागाध्यक्ष करेंगे।

स्थानांतरण ऐक्ट पर अमल में कठिनाई होने की स्थिति में ऐक्ट के प्रावधानों में छूट पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति विचार करेगी। इस समिति में अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव वन एवं अवस्थापना विकास आयुक्त, अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव कृषि उत्पादन आयुक्त, प्रमुख सचिव कार्मिक बतौर सदस्य शामिल होंगे। समिति छूट के संबंध में अपनी सिफारिश मुख्यमंत्री को अनुमोदन के लिए भेजेगी। इसके बाद राज्य सरकार आवश्यक नियम बना सकेगी।

ट्रांसफर ऐक्ट में यह भी प्रावधान है कि प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरण सुगम से सुगम में नहीं होगा। प्रशासनिक आधार पर हटाए गए कार्मिक को किसी भी दशा में दोबारा उसी जिले या स्थान पर पांच वर्ष तक तैनात नहीं किया जाएगा। सरकारी सेवकों के मान्यताप्राप्त सेवा संघों के अध्यक्ष व सचिव पदधारित करने की तिथि से पद पर बने रहने या दो वर्ष की अवधि, जो भी पहले हो, तक स्थानांतरित नहीं किए जा सकेंगे।

इस ऐक्ट में अनिवार्य तबादलों के बाद अनुरोध के आधार पर तबादले के लिए कार्मिकों की पात्रता निर्धारित की गई है। स्थानांतरण समिति इस पात्रता पर विचार करेगी। इसके मुताबिक गंभीर रूप से रोगग्रस्त, विकलांग कार्मिकों के स्वयं अथवा पति-पत्नी की गंभीर रोगग्रस्तता के आधार पर अनुरोध किया जा सकेगा।

मानसिक रूप से विक्षिप्त एवं लाचार बच्चों के माता-पिता, सेवारत पति-पत्नी जिनका इकलौता पुत्र या पुत्री विकलांग हो, राज्य सरकार की सेवा में कार्यरत पति-पत्नी की ओर से सामान्य श्रेणी के स्थल में तैनाती का अनुरोध, विधवा, विधुर, सक्षम न्यायालय के आदेश से घोषित परित्यक्तता एवं तलाकशुदा कार्मिक एवं वरिष्ठ कार्मिकों द्वारा अनुरोध पर विचार किया जाएगा। दुर्गम कार्यस्थल से दुर्गम कार्यस्थल में तबादला और सुगम क्षेत्र से दुर्गम में तबादले के अनुरोध पर विचार होगा।

एस ऐक्ट के तहत तबादलों के लिए समयसारिणी भी तय की गई है। इसके मुताबिक कार्मिकों के तबादला आदेश 10 जून तक जारी होंगे। स्थानांतरित कार्मिकों को तबादला आदेश के सात दिन के भीतर कार्यमुक्त और दस दिन के भीतर कार्यभार ग्रहण करना होगा। राज्य सरकार को समयसारिणी में बदलाव का अधिकार होगा। हर वर्ष कार्यालयाध्यक्ष व विभागाध्यक्ष सुगम व दुर्गम कार्यस्थल का मानक के मुताबिक चिह्नीकरण 31 मार्च तक करेंगे, जबकि एक अप्रैल तक विभागाध्यक्षों, शासन, मंडल और जिला स्तर पर स्थानांतरण समितियों का गठन एक अप्रैल तक किया जाएगा। सुगम-दुर्गम तबादलों के लिए पात्र कार्मिकों की रिक्तियों का प्रकाशन व वेबसाइट पर प्रदर्शन 15 अप्रैल तक होगा।

10 इच्छित स्थानों के लिए विकल्प मांगने की तिथि 20 अप्रैल और अनुरोध के आधार पर आवेदन मांगने की तिथि 30 अप्रैल तय की गई है। स्थानांतरण समिति की बैठक व संस्तुति देने की अवधि 25 मई से पांच जून रहेगी। स्थानांतरण आदेश जारी होने के दो दिन के भीतर उन्हें वेबसाइट पर प्रदर्शित किया जाएगा।

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