Mon. Jan 21st, 2019

कॉमनवेल्थ रेसलिंग चैंपियनशिप में किया भारतीय पहलवानों ने ऐतिहासिक प्रदर्शन

पिछले 15 से 17 दिसंबर तक जोहानिसबर्ग में आयोजित कॉमनवेल्थ रेसलिंग चैंपियनशिप में भारतीय पहलवानों ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। कुल 60 में से 59 मेडल जीतने में सफल रहे। जिन एक पहलवान को मेडल नहीं मिल सका उसकी वजह उनका चोटिल होना था। ग्रीको रोमन स्टाइल में हम इंटरनैशनल लेवल पर एक अदद मेडल के लिए तरस जाते हैं। मगर इस बार 20 पहलवान मैट पर थे और सभी ने आपस में गोल्ड और सिल्वर मेडल बांटे। इस प्रदर्शन के बाद भले ही हर तरफ पहलवानों की तारीफ हो रही हो, लेकिन अगर इसकी तह में जाएं तो कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आते हैं।

सीधे फाइनल खेले
चैंपियनशिप के सभी भार वर्गों में हर देश को 2-2 पहलवान उतारने की अनुमति थी और भारत ने ऐसा ही किया। महिला वर्ग के कई मुकाबलों में तो केवल भारतीय पहलवान ही आमने-सामने थीं। 65 किग्रा वर्ग में सीधे फाइनल मुकाबला हुआ जहां ऋतु मलिक ने गार्गी यादव को हराकर गोल्ड जीता। गीता फोगाट के वर्ग में उनके अलावा भारत की ही रविता और ऑस्ट्रेलिया की एक रेसलर थीं। यही हाल 53, 55 और 72 किग्रा भार वर्ग में रहा जहां पहलवानों को एक ही मुकाबले के बाद फाइनल में जगह मिली और वहां भी मुकाबला अपने ही देशवासी से हुआ।

मुकाबलों से पहले मेडल पक्का
ग्रीको रोमन में केवल भारत, पाकिस्तान और मेजबान साउथ अफ्रीका के पहलवान ही केवल मैट पर उतरे। ज्यादातर मुकाबलों में 3 पहलवान ही थे जिनमें दो तो भारत के ही थे। ऐसे में मुकाबलों से पहले ही मेडल मिलना तय हो गया था। सारे फाइनल भारतीय पहलवानों के बीच हुए। कुछ ऐसा ही फ्री स्टाइल में हुआ। 70 किग्रा, 86 किग्रा और 97 किग्रा में भारतीय पहलवान ही फाइनल में एक-दूसरे के सामने थे। 92 किग्रा में तो भारत के सोमवीर और अजरुद्दीन के अलावा पाकिस्तान के केवल मुहम्मद इनाम ही होड़ में थे।

हमारी क्या गलती: बृजभूषण
रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रेजिडेंट बृजभूषण शरण सिंह पहलवानों के प्रदर्शन से खुश हैं। हालांकि, उन्होंने भी स्वीकारा कि यह बहुत बड़ा टूर्नमेंट नहीं था। उन्होंने कहा, ‘अगर कोई टीम नहीं आई तो इसका मतलब यह नहीं कि हम भी अपनी टीम नहीं भेजते। अगर सभी देश आते तब भी हमारे पहलवान इसी तरह मेडल जीतते।’ रेसलिंग के जाने-माने कोच जगदीश कालीरमण ने भी बृजभूषण शरण की बात पर सहमति जताई और कहा, ‘रेसलिंग में हमारे पहलवान कॉमनवेल्थ देशों में लगातार अच्छा करते रहे हैं। ये बात अलग है कि इस बार दूसरे देशों की इसमें रुचि कम रही। अगर बाकी देश आते भी तब भी हमारे पहलवानों का प्रदर्शन ऐसा ही रहता।’

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