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राजस्थान: एससी,एसटी एक्ट के सालाना 70 फीसदी मामले झूठे

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों अनुसूचित जाति,जनजाति ( एससी,एसटी ) एक्ट के मामलों में सीधे गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है । प्रकरण में पहले पुलिस उप अधीक्षक स्तर के अधिकारी मामले की जांच कर सात दिन में अपनी रिपोर्ट देंगे और फिर जिला पुलिस अधीक्षक की अनुमति के बाद ही गिरफ्तारी हो सकेगी ।

 सुप्रीम कोर्ट ने इस एक्ट का दुरूपयोग रोकने के लिए यह बदलाव कर नए सीरे से गाइड लाइन जारी की है । सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद देश में पिछले तीन दिन से आंदोलन हो रहे हैं । हंगामें के बीच राजस्थान में एससी,एसटी एक्ट के मामलों को लेकर पुलिस मुख्यालय से जब जानकारी एकत्रित की गई तो चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं ।

पुलिस से मिली जानकारी में सामने आया कि एससी,एसटी एक्ट के तहत वार्षिक औसतन 125 मामले दर्ज किए जा रहे हैं,जांच के बाद इनमें से 70 प्रतिशत मामले झूंठे पाए गए हैं । राजस्थान पुलिस के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2015 में 112 मामले दर्ज हुए इनमे से 79 मामले झूंठे पाए गए थे । इसी तरह से वर्ष 2016 में 158 मामले दर्ज हुए और इनमें से 109 मामले झूंठे पाए गए । वहीं वर्ष 2017 में कुल 106 मामले दर्ज किए गए,इनमें से 59 मामले झूंठे पाए गए थे । पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश मामलों में जांच के दौरान सामने आता है कि जिस व्यक्ति ने रिपोर्ट दर्ज कराई है,उसने अपने सामने वाले पक्षकार को फंसाने के लिए लिए ही एससी,एसीट एक्ट की धाराएं लगवाने का प्रयास किया ।

राजस्थान पुलिस में सिविल राइट्स के अतिरिक्त महानिदेशक एम.एल.लाठर का कहना है कि साल,1989 में एससीएसटी एक्ट लागू किया गया और तभी से दर्ज मामलों की जांच पुलिस उप अधीक्षक स्तर के अधिकारी करते रहे हैं । सुप्रीम कोर्ट से मिली नई गाइड लाइन सभी पुलिस कमिश्नरों और जिला पुलिस अधीक्षकों को भेज दी गई है ।

इधर राजस्थान उच्च न्यायालय बार काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष अशोक मेहता का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का कदम काफी अच्छा है ।कानून बनाया गया तो उद्ेश्य काफी अच्छा था,लेकिन पिछले कुछ समय से सामने आ रहा है कि इसका दुरूपयोग बढ़ रहा है । एड़वोकेट रमेश पारीक का कहना है कि एससी,एसटी एक्ट का दुरूपयोग बढ़ने लगा था,अब सुप्रीम कोर्ट का आदेश सही है ।

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