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अमावस्या पर जरूर करें जरूरतमंदों को दान

अमावस्या को दान पुण्य के लिए बहुत ही सौभाग्यशाली दिन माना जाता है। अमावस्या एक मास के एक पक्ष के अंत का सूचक है। अमावस्या से प्रारंभ होने वाले पक्ष को शुक्ल पक्ष कहा जाता है। इस पूरे समय में चंद्रमा की रोशनी धीरे-धीरे बढ़ती है। शुक्ल पक्ष के बाद पूर्णिमा आती है और उसके बाद कृष्ण पक्ष जिसके 15 दिनों में चंद्रमा की रोशनी कम होती है। कृष्ण पक्ष के अंतिम दिन जब चंद्रमा दिखाई नहीं देता तो वह दिन अमावस्या का होता है।

ज्येष्ठ अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है। ज्येष्ठ अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र नदियों या सरोवर में स्नान करें। सूर्य देव को अर्घ्य दें और धारा में तिल प्रवाहित करें। इस दिन पीपल के वृक्ष में जल का अर्घ्य देना चाहिए। शनिदेव की पूजा तेल, तिल और दीप जलाकर करें। शनि चालीसा का पाठ करें। पूजा आराधना के पश्चात अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान अवश्य देना चाहिए। अधिक मास को मलमास, पुरुषोत्तम मास आदि नामों से पुकारा जाता है। अधिक मास में शुभ कार्य नहीं किए जाते लेकिन धार्मिक अनुष्ठान के लिए यह माह उत्तम माना जाता है। अधिकमास के अधिपति स्वामी भगवान विष्णु माने जाते हैं। पुरुषोत्तम भगवान विष्णु का ही एक नाम है। इसीलिए अधिकमास को पुरुषोत्तम मास नाम से भी जाना जाता है।

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