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एनजीटी ने पर्वतीय राज्यों के वनों में लगने वाली आग पर रिपोर्ट मांगी

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी)  ने पर्वतीय राज्यों के वनों में बार-बार लगने वाली आग पर चिंता जताई है।एनजीटी ने राज्यों से यह पूछा है कि उन्होंने ऐसी घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाए हैं।

अधिकरण के कार्यवाहक अध्यक्ष जावेद रहीम की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने इस मामले में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय और अरूणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, नगालैंड, सिक्किम, जम्मू कश्मीर तथा पश्चिम बंगाल को पक्षकार बनाया है। अधिकरण ने इन पर्वतीय राज्यों को नोटिस भी जारी किये हैं। इन राज्यों को एक हलफलामा दाखिल करने के निर्देश दिये गये हैं, जिसमें वे वनों में लगने वाली आग को रोकने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी दें। इन राज्यों को दो हफ्ते में हलफनामे दाखिल करने हैं।

वनों में लगने वाली आग से पर्यावरण को बहुत नुकसान होता है। बहरहाल, इस मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी। अधिकरण गैर सरकारी संगठन ‘फ्रेंड्स’ की याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसका आरोप है कि जंगलों में लग रही आग लकड़ी माफिया और कुछ लोभी ग्रामीणों तथा अधिकारियों के बीच सांठगांठ है।

आरोप लगाया कि उत्तराखंड सरकार ने आग पर काबू पाने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाये है, जिसके चलते लगभग समूचा पर्वतीय क्षेत्र प्रभावित हुआ है। राज्य सरकार ने कहा कि वन आग प्रबंधन योजना को अंतिम रूप दिया जा चुका है और उसके द्वारा पेश रिपोर्ट में अब तक की गयी कार्रवाई का विवरण शामिल है।याचिका में कहा गया है कि इस मौसम में उत्तराखंड में वनों में आग लगने की 1,300 से अधिक घटनाएं हुई और 2,600  हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचा।

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