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भारत में अदालत कक्ष कि संख्या न्यायाधीशों के स्वीकृत पदों से भी कम

नई दिल्ली। कानून मंत्रालय के एक दस्तावेज में आये तथ्यो के अनुसार देश में अधीनस्थ न्यायपालिका के तहत निचली अदालतों के लिए अदालत कक्षों की संख्या न्यायाधीशों के स्वीकृत पद से भी कम है। दस्तावेज में कहा गया है कि अब ध्यान इस असंतुलित अनुपात को संतुलित करने पर है। दस्तावेज में कहा गया कि जब यह संख्या बराबर हो जाएगी तो इससे देश में न्यायपालिका के कामकाज और प्रदर्शन में सुधार लाने में भी मदद मिलेगी।

कानून मंत्रालय से संबद्ध संसदीय सलाहकार समिति के सदस्यों के बीच वितरित अजेंडा पेपर में कहा गया कि देश में जिला और अधीनस्थ अदालतों के लिए सिर्फ 17,576 अदालत हॉल और महज 14,363 आवासीय इकाइयां उपलब्ध हैं। देश में जिला एवं अधीनस्थ अदालतों में न्यायिक अधिकारियों के स्वीकृत पदों की संख्या 22,288 है। अजेंडा पेपर में कहा गया कि अब ध्यान जिला एवं अधीनस्थ अदालतों में अदालत कक्षों की संख्या को न्यायिक अधिकारियों की संख्या के बराबर करने पर है। इससे देश में न्यायपालिका में कामकाज और प्रदर्शन बेहतर होगा।

सरकार ने 16 नवंबर को अपने द्वारा प्रायोजित उस योजना को जारी रखने का फैसला लिया था जिसका उद्देश्य निचली अदालतों में आधारभूत ढांचे को विकसित करना है। इसके तहत अधीनस्थ अदालतों के न्यायिक अधिकारियों के लिए 3,000 अदालत कक्षों और 1,800 आवासीय इकाइयों का निर्माण करना है।

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