Mon. Dec 10th, 2018

देहरादून में तीन दिन से डेरा डाले हैं बिहार के 50 अभिभावक, स्कूल पर ठगने का आरोप

शिक्षा का हब माने जाने वाला देहरादून शहर अपने नामी स्कूलों के लिए देश भर में मशहूर है और इसकी इसी प्रसिद्धि का फ़ायदा कुछ लोग धोखाधड़ी के लिए भी कर रहे हैं. देहरादून की ख्याति का फ़ायदा उठाकर बिहार के एक वरिष्ठ आईएएस के नाम पर बिहार के ही 50 से ज़्यादा लोगों को फंसा लिया गया जो तीन दिन से इंसाफ़ की गुहार लगाने के लिए देहरादून में हैं.

राजधानी देहरादून की जैन धर्मशाला में पिछले तीन दिन से बिहार के 50 अभिभावक अपने बच्चों का भविष्य बचाने के लिए डेरा डाले हैं. इनका कहना है कि इन्हें देहरादून के नाम पर फंसा लिया गया है.  बिहार की राजधानी पटना के अख़बारों में जिओ फ़ोन की तरह ‘मुफ़्त’ में पढ़ाने के पूरे पेज के विज्ञापन दिए गए थे. उसी विज्ञापन के आधार पर बड़ी संख्या में लोगों ने अपने बच्चों का एडमिशन करवा दिया.

आइए नज़र डालते हैं कि इस विज्ञापन में था क्या…

    • स्कूल का कहना था कि अभिभावकों को एक बार में छह-सात लाख रुपये देने हैं
    • इसके बाद दसवीं कक्षा तक की पढ़ाई, रहने, खाने के लिए कोई पैसा नहीं देना है
    • दसवीं पास करने के बाद एडमिशन के समय जमा करवाए गए पैसे वापस करने का दावा
    • विज्ञापन में कहा गया था कि इस तरह बच्चा पूरी तरह मुफ़्त में दसवीं पास कर लेता है
    • स्कूल की इस योजना को पूरी तरह कानूनी बताया गया
    • विज्ञापन में चेयरमैन के रूप में बिहार के ही IAS अधिकारी की तस्वीर देख लोगों का विश्वास बढ़ा

लेकिन स्कूल ने विज्ञापन में किए वादे के विपरीत पहले साल से ही रहने, खाने और अन्य खर्चों के नाम पर पैसे लेने शुरू कर दिए. शुरुआत 22000 रुपये सालाना से हुई और यह बढ़ते-बढ़ते इस साल यह मांग 65000 रुपये तक पहुंच गई.

इस साल स्कूल के चेयरमैन ने पटना में ही अभिभावकों के साथ बैठक की और कहा कि स्कूल की माली हालत ठीक नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि आगे स्कूल चलाना मुश्किल हो रहा है. स्कूल चलता रहे इसलिए अभिभावकों को अब 60 हज़ार रुपये देने होंगे.

पटना में कोई बात नहीं बनी तो ये अभिभावक देहरादून पहुंच गए. यहां आकर पता चला कि स्कूल प्रबंधन स्कूल को बेचने की योजना बना रहा है तो उनके पैरों तले ज़मीन खिसक गई. स्कूल बेचने के बाद बच्चों का क्या होगा इस बारे में कोई बात करने को तैयार नहीं है.

अब स्कूली छात्रों के अभिभावकों का कहना है कि स्कूल में न तो बच्चों को सही से भोजन मिलता है और न ही स्कूल में पूरे शिक्षक हैं.

अभिभावकों के आरोप पर जब न्यूज़ 18 की टीम स्कूल गई और स्कूल में मौजूद छात्रों से वार्ता की तो उन्होंने भी वही कहा जो अभिभावकों ने कहा था.. न खाना-पीना ठीक है और न ही पढ़ाई….

लेकिन स्कूल प्रबंधन इन सभी आरोपों को गलत बता रहा है. हालांकि स्कूल के को-ओर्डिनेटर मणिकांत यह ज़रूर कहते हैं कि स्कूल की आर्थिक हालात सही नहीं है.

यह सभी अभिभावक आज उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे से भी मिले और उन्हें व्यथा बताई. इन लोगों का कहना है कि शिक्षा मंत्री ने उन्हें मामले में दखल देने का वादा किया है.

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