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शहरी निकाय चुनाव का उत्तर प्रदेश मॉडल अपनाएगी झारखंड सरकार

रांची। उत्तर प्रदेश में दलीय आधार पर हुए निकाय चुनाव में उम्दा प्रदर्शन को देखते हुए झारखंड सरकार यहां भी शहरी निकाय चुनाव का उत्तर प्रदेश मॉडल अपनाएगी। मुख्यमंत्री रघुवर दास के निर्देश के बाद गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और दिल्ली की चुनावी प्रक्रिया का अध्ययन करने के बाद नगर विकास व आवास विभाग की टीम ने इससे संबंधित मसौदा तैयार किया है।

राज्य के आठ स्थानीय शहरी निकायों को छोड़कर शेष निकायों का कार्यकाल दो मई को पूरा हो रहा है। ऐसे में निर्धारित अवधि से पूर्व चुनाव कराना सरकार की संवैधानिक बाध्यता है। लिहाजा सरकार इस मसौदे को जल्द से जल्द कैबिनेट में लाने के बाद शीतकालीन सत्र में पेश करने की तैयारी में है।

दलीय आधार पर चुनाव कराने के लिए सरकार को झारखंड नगरपालिका निर्वाचन नियमावली में संशोधन करना होगा, जिसके लिए उसे कई प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। झारखंड नगरपालिका निर्वाचन नियमावली में संशोधन के बाद नगर निगम क्षेत्र के मेयर और डिप्टी मेयर व नगर पंचायत व नगर परिषद के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार पार्टी के चुनाव चिह्न पर अपनी किस्मत आजमाएंगे।

संशोधन प्रस्ताव में वार्ड पार्षदों की निर्वाचन प्रक्रिया में भी बदलाव के संकेत हैं। अब तक पार्षद का चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार को उसी वार्ड का मतदाता होने की बाध्यता थी, परंतु अब अन्य वार्डो की मतदाता सूची में नाम रहने के बावजूद वे अन्य वार्डो से चुनाव लड़ सकेंगे।

लंबे समय के बाद झारखंड में 2008 में पहली बार शहरी निकायों के चुनाव कराए गए थे। इसके बाद 2013 में दूसरी बार चुनाव हुआ। इनमें से आठ निकायों मझिआंव, विश्रामपुर, कोडरमा, झुमरीतिलैया, देवघर, धनबाद, चास और चक्रधरपुर में 2015 में मतदान कराए गए थे। लिहाजा इन निकायों में अब 2020 में चुनाव होंगे।

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