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बिजली बिल वसूली पर नहीं चलेगी बिल्डरों की मनमानी, कंपनी देगी सीधा कनेक्शन

प्रदेश में बहुमंजिले भवनों में रहने वालों से बिल्डर अब मनमाना बिजली बिल नहीं वसूल सकेंगे। फ्लैट खरीदने वाले अपना अलग बिजली कनेक्शन ले सकेंगे। राज्य विद्युत नियामक आयोग की सप्लाई कोड रिव्यू पैनल सब कमेटी की बैठक में ऐसे भवनों में सिंगल पॉइंट कनेक्शन के बजाय मल्टीपल कनेक्शन जारी करने पर सहमति बन गई है।

अब आयोग की ओर से इसका औपचारिक आदेश भर जारी होना है। बैठक में किए फैसले के अनुसार, 31 मार्च 2019 तक सभी सिंगल पॉइंट कनेक्शन वाले मल्टी स्टोरी भवनों को मल्टीपल कनेक्शन में तब्दील करना होगा ताकि उपभोक्ता सीधे बिजली कंपनी से कनेक्शन ले सकें।

इन भवनों में बिजली बिल को लेकर फ्लैट खरीदार व बिल्डर के बीच विवाद की शिकायतें बिजली कंपनियों और नियामक आयोग में पहुंच रही थीं। कई खरीदारों ने बिल्डरों के खिलाफ आयोग के साथ-साथ न्यायालय में भी याचिका दायर कर रखी है। बिजली बिल वसूली में मनमानी पर नोएडा के एक बड़े बिल्डर के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज हो चुकी है।

बिजली दरों के प्रस्ताव पर जनसुनवाई के दौरान भी फ्लैट खरीदारों की तरफ से बिल्डरों द्वारा उत्पीड़न की शिकायत होती रही है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद भी लंबे समय से इसकी मांग कर रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए नियामक आयोग के अध्यक्ष राज प्रताप सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को हुई सप्लाई कोड रिव्यू पैनल सब कमेटी की बैठक में मल्टी स्टोरी में रहने वालों को अलग कनेक्शन देने का फैसला किया गया है।

सूत्रों के मुताबिक इस मामले में बिजली कंपनियों के प्रतिनिधियों ने व्यावहारिक कठिनाइयों का हवाला देते हुए थोड़ा विरोध भी किया। उनका कहना था कि बड़े बहुमंजिले भवनों में सभी उपभोक्ताओं पर निगरानी रखना मुश्किल होगा।

पैनल में उपभोक्ताओं के प्रतिनिधि के रूप में शामिल उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने विद्युत अधिनियम 2003 की धारा-43 का हवाला देते हुए कहा, इसमें स्पष्ट प्रावधान है कि किसी भी उपभोक्ता को कनेक्शन देने से रोका नहीं जा सकता।

कनेक्शन देते समय बिल्डर खरीदारों से लाखों रुपये बतौर जमानत राशि वसूलते हैं। बैठक में आयोग के सदस्य एसके अग्रवाल, सचिव संजय श्रीवास्तव, निदेशक विद्युत सुरक्षा शुभ्रा सक्सेना, मध्यांचल वितरण निगम के एमडी संजय गोयल, पावर कॉर्पोरेशन के निदेशक वाणिज्य एके श्रीवास्तव सहित सभी बिजली कंपनियों के निदेशक वाणिज्य मौजूद थे।

20-25 रुपये प्रति यूनिट तक होती है वसूली

बैठक में बताया गया कि बिल्डर सिंगल पॉइंट कनेक्शन लेकर फ्लैट में रहने वालों से आयोग द्वारा तय टैरिफ के विपरीत 20-25 रुपये प्रति यूनिट तक की दर से बिल वसूलते हैं। बिल्डर मीटर से छेड़छाड़ करके बिजली चोरी भी करते हैं जिससे बिजली कंपनियों को चपत लगती है। अलग से जमानत राशि जमा कराकर भी उपभोक्ताओं का शोषण किया जाता है। पैनल के सदस्यों का कहना था कि बिल्डरों की मनमानी पर अंकुश के लिए इस व्यवस्था को समाप्त करना जरूरी है।

31 मार्च 2019 तक करनी होगी व्यवस्था

फैसले के अनुसार, प्रदेश में उन सभी बिल्डरों को 31 मार्च 2019 तक मल्टीपल कनेक्शन की व्यवस्था करनी होगी जहां अभी सिंगल पॅाइंट कनेक्शन दिए गए हैं। इसके बाद फ्लैट खरीदने वाले सीधे बिजली कंपनी से कनेक्शन ले सकेंगे। आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रिव्यू पैनल की बैठक में इस पर सैद्धांतिक सहमति बन गई है। जल्द ही आयोग इसे कानूनी जामा पहनाते हुए आदेश जारी करेगा।

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