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सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की शांति भूषण की याचिका, कहा-मुख्य न्यायाधीश ही हैं रोस्टर के मास्टर

रोस्टर के मास्टर मुख्य न्यायाधीश ही हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को रोस्टर के मास्टर मामले में चल रहे विवाद को समाप्त कर दिया है। न्यायालय ने कहा कि रोस्टर मामले में विवाद की कोई जगह नहीं है।

सर्वोच्च न्यायालय आज उस याचिका पर अपना फैसला सुनाया जिसमें वरिष्ठ वकील शांति भूषण ने भारत के चीफ जस्टिस (सीजेआई) को शीर्ष न्यायालय में मामलों के आवंटन का रोस्टर तैयार करने की प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी। जस्टिस एके सीकरी और अशोक भूषण की पीठ ने इस याचिका पर अपना निर्णय 27 अप्रैल को सुरक्षित रख लिया था, जिसे शुक्रवार सुनाया है। 

कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश को सर्वोच्च बताते हुए कहा कि इस बात  से इनकार नहीं किया जा सकता है कि न्यायाधीशों में वरिष्ठतम होने की वजह से उन्हें कुछ विशेष अधिकार प्राप्त हैं। कोर्ट ने यह  भी कहा कि सिर्फ प्रशासनिक स्तर ही नहीं न्यायिक स्तर पर भी सुधार के लिए काम किए जा रहे हैं। 

अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने इस मामले में फैसला सुरक्षित करने का विरोध किया था। अटार्नी जनरल का कहना है कि मामलों के आवंटन के अधिकार में अन्य जजों को शामिल करने का प्रयास अव्यवस्था को बढ़ावा देगा। 

इससे पहले शांति भूषण ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि मास्टर ऑफ रोस्टर अनियंत्रित और निरंकुश विवेकाधीन शक्ति नहीं हो सकती, जिसके जरिए सीजेआई खास जजों की पीठ गठित कर सकें या खास जजों को मामले सौंप सकें।

ये याचिका 12 जनवरी को सर्वोच्च न्यायालय के 4 वरिष्ठ जजों की प्रेस कांफ्रेंस के बाद दाखिल की गई थी, जिसमें जस्टिस जे. चेलमेश्वर (वर्तमान में सेवानिवृत्त), जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी. लोकुर और जस्टिस कूरियन जोसेफ ने आरोप लगाया था कि शीर्ष न्यायालय में स्थिति सही नहीं है। 

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