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भारतीय नौसेना का गौरवपूर्ण इतिहास :भारतीय नौसेना दिवस पर विशेष

नई दिल्ली। देश की तीन सेनाओं में से एक नौसेना अपने सर्वश्रेष्ठ स्वरूप में है। अपनी क्षमताओं में लगातार इजाफा करते हुए यह आज दुनिया की सबसे बड़ी नौसेनाओं में शामिल है। इसके पास बड़ी संख्या में युद्धपोत और अन्य जहाज हैं, जिनमें से अधिकतर स्वदेशी हैं। जल्द ही देश में बनी पहली पनडुब्बी आइएनएस कलवरी भी नौसेना में शामिल होने वाली है।

नौसेना का नीति वाक्य है शं नो वरुण:। इसका मतलब है कि जल के देवता वरुण हमारे लिए मंगलकारी रहें।आजादी के बाद से नौसेना ने अपनी शक्तियों में लगातार इजाफा किया है। हमारे युद्धपोत और मिसाइलें समुद्र के नीचे, समुद्र के ऊपर और समुद्री सतह पर लक्ष्य भेद कर सकती हैं। न सिर्फ तटों की रक्षा बल्कि नई तकनीक तैयार करने और आपदा के समय राहत कार्यों में भी नौसेना हमेशा आगे रहती है।

तीनों सेनाओं में मेक इन इंडिया का सिद्धांत सबसे पहले नौसेना ने ही शुरू किया। थल सेना व वायु सेना के मुकाबले नौसेना में अधिक स्वदेशी लड़ाकू उपकरण हैं।भारतीय नौसेना आस्ट्रेलिया, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, फ्रांस, इंडोनेशिया, म्यांमार, रूस, सिंगापुर, श्रीलंका, थाईलैंड, ब्रिटेन, अमेरिका व जापान के साथ युद्धाभ्यास करती है। जापान और अमेरिका के साथ इस साल जुलाई में दक्षिण चीन सागर में किए गए मालाबार युद्धाभ्यास ने चीन की नींद उड़ा दी। यह भारतीय नौसेना की शक्ति का प्रतीक है।

नौसेना का इतिहास

-1612 में ब्रिटिश सेना ने अपने व्यापार की रक्षा करने के लिए गुजरात में सूरत के पास एक छोटी नौसेना की स्थापना की। इसे ऑनरेबल ईस्ट इंडिया मरीन नाम दिया गया।
-1686 में जब अंग्रेजों ने बंबई (अब मुंबई) से व्यापार करना शुरू किया तो सेना को बंबई मरीन नाम दिया गया।
-1892 में इसे रॉयल इंडियन मरीन नाम से पुकारा जाने लगा।
-26 जनवरी, 1950 को भारत के लोकतांत्रिक गणराज्य बनने के बाद इसका नाम बदलकर भारतीय नौसेना किया गया।
-22 अप्रैल, 1958 को वाइस एडमिरल आर डी कटारी को नौसेना का पहला भारतीय प्रमुख नियुक्त किया गया।

जहाजों का बेड़ा
भारतीय नौसेना ने अपनी स्थापना से अब तक खुद को सभी दिशाओं में विस्तार दिया है। द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत में नौसेना के पास महज आठ युद्धपोत थे। आज नौसेना के पास लड़ाकू विमान ले जाने वाला युद्धपोत आइएनएस विक्रमादित्य है। 11 विध्वंसक, 14 फ्रिगेट, 24 लड़ाकू जलपोत, 29 पहरा देने वाले जहाज, दो परमाणु पनडुब्बियों सहित 13 अन्य पनडुब्बियों और अन्य कई जलयानों की बड़ी फौज है।


चार दिसंबर को भारतीय नौसेना दिवस के रूप में चुने जाने का कारण है ऑपरेशन ट्राइडेंट। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय इसी दिन भारतीय नौसेना ने अपने सबसे बड़े अभियानों में से एक को अंजाम दिया और युद्ध में जीत सुनिश्चित की। तीन दिसंबर, 1971 की शाम पाकिस्तानी वायुसेना ने छह भारतीय हवाई अड्डों पर हमला किया। रात को तीन भारतीय मिसाइल जहाजों- आइएनएस निर्घाट, आइएनएस निपाट और आइएनएस वीर ने मुंबई से कराची की ओर प्रस्थान किया। इन जहाजों ने दो पनडुब्बी रोधी युद्धपोतों- आइएनएस किल्तान और आइएनएस कैट्चाल के साथ मिलकर ट्राइडेंट टीम बनाई। चार दिसंबर की रात में इस अभियान के तहत भारतीय बेड़े ने चार पाकिस्तानी जहाजों को डुबा दिया और दो जहाजों को नष्ट कर दिया। कराची बंदरगाह और ईंधन डिपो को भारी नुकसान पहुंचाया। खास बात यह रही कि भारतीय नौसेना को किसी तरह की क्षति नहीं हुई।

7,517 किमी : भारतीय तट की लंबाई
67,109 : नौसेना में सक्रिय कर्मी
135 : युद्धपोतों की संख्या

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