Mon. Dec 10th, 2018

प्रलय का संकेत दे रहा उत्तराखंड का यह मंदिर

देवभूमि उत्तराखंड के चमोली जिले में एक ऐसा मंदिर है जो हमेशा प्रलय के संकेत देता है। नरसिंह मंदिर जोशीमठ के नाम से मशहूर यह मंदिर भगवान नरसिंह को समर्पित है, जो लक्ष्मीपति भगवान विष्णु के चौथे अवतार हैं। आदिगुरू शंकराचार्य ने इस मंदिर की स्थापना 8वीं सदी में की थी। शंकराचार्य ने स्वयं इस स्थान पर भगवान नरसिंह की शालिग्राम की स्थापना की थी। आइए जानते हैं आखिर इस मंदिर का प्रलय से क्या संबंध है…

बताया जाता है कि इस मंदिर की मूर्ती का निर्माण राजा ललितादित्य युक्का पीड़ा ने करवाया था। हालांकि कुछ यह भी मानते हैं कि शालिग्राम से एकाएक यह मूर्ति स्वयं प्रकट हुई थी। यहां भगवान नरसिंह एक एक कमल पर विराजमान हैं।

यहां भगवान नरसिंह के साथ बदरीनाथ, कुबेर और उद्धव भी स्थापित हैं। इस मंदिर भगवान राम और सीता की मूर्ती भी विराजमान है। बताया जाता है कि इस मंदिर की स्थापित भगवान नरसिंह की मूर्ती हर साल पतली होती जाती है।

यहां भगवान नरसिंह का एक हाथ पतला है और यह पतला होता जा रहा है। ऐसी मन्यता है कि कलयुग के अंत में हाथ पतला होकर टूटकर गिर जाएगा और इसके बाद प्रलय होगी। बदरीनाथ के नर और नारायण पर्वत एक हो जाएंगे और वर्तमान में जहां बदरीनाथ की पूजा होती है वहां नहीं हो पाएगी।

फिर यह जोशीमठ के तपोवन क्षेत्र में स्थित भविष्य बदरी मंदिर में भगवान बद्रीनाथ के दर्शन होंगे। केदारखंड के सनतकुमार संहिता में भी इसका उल्लेख मिलता है।

भविष्य बदरी मंदिर के पास ही एक पत्थर पर आदि गुरू शंकराचार्य ने एक भविष्य वाणी भी लिखी है। मान्यता है कि आज तक यह भविष्य वाणी कोई भी नहीं पड़ सका है।

भगवान नरसिंह को अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा करने के लिए और राक्षस हिरण्यकशिपु का वध करने के लिए जाना जाता है। हिरण्यकशिपु को वध करने के लिए भगवान ने आधा शरीर मनुष्य का और आधा शरीर सिंह के रूप में अवतार लिया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *