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एक रुपये के नोट का आज 100वां जन्मदिन

एक रुपये का नोट आज 100 साल का हो गया । एक रुपये के नोट का आज 100वां जन्मदिन है। 30 नवंबर 1917 को तत्कालीन अंग्रेज सरकार ने इसका देश में एक रुपये के नोट प्रचलन शुरू किया था। हालांकि अब एक रुपये का नोट का बाजार में बहुत कम चलन है। केंद्र सरकार ने 1995 में नोट छापना बंद कर दिया था।

अग्रेंज सरकार ने जब इस नोट का प्रचलन शुरू किया था, तब ये देश में नहीं छपता था। इसको बकायदा इंग्लैंड से छपवा कर लाया गया था। पहले विश्वयुद्ध के दौरान औपनिवेशक अधिकारी टकसालों की असमर्थता के कारण 1 रुपया का नोट छापने को मजबूर हो गए थे। पहले एक रुपया के नोट पर पांचवे किंग जॉर्ज की तस्वीर छपी थी। साल 1926 में इसकी छपाई लागत लाभ के विचारों के चलते बंद कर दी गई थी।

एक रुपये का नोट इसलिए जारी किया गया क्योंकि पहले विश्व युद्ध के बाद चांदी की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हो गई थी। विश्व युद्ध के समय तक चांदी के एक रुपये के सिक्के का प्रचलन था। दिलचस्प है कि विभाजन के बाद भी सालों तक पाकिस्तान में भी एक रुपये का नोट चलता रहा।

आजादी के बाद भारतीय नोटों में ब्रिटेन के किंग की जगह भारत के राष्ट्रीय चिन्ह तीन शेर और अशोक चक्र को जगह दी गई। एक रुपये का नोट भी अपवाद नहीं था। सूत्रों के अनुसार, पिछले सौ सालों में एक रुपये के करीब 125 प्रकार के नोट चलन में आए, जिन पर 28 प्रकार की डिजाइन थी।

केवल एक रुपये का नोट ऐसा था, जिसे भारत सरकार जारी करती थी। बाकी सभी नोट रिजर्व बैंक जारी करता है और उस पर गवर्नर के हस्ताक्षर होते थे। लेकिन एक रुपये के नोट पर वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते थे। एक रुपया के नोट पर ‘मैं धारक को वचन देता हूं’ भी इसलिए नहीं छपा होता था।

बंद हुए एक रुपये के नोट की आज लाखों में कीमत है। ईबे सहित अन्य कई ऑनलाइन वेबसाइट पर इसकी कीमत इतनी है कि आपको इसे खरीदने के लिए अपना लाख रुपये का सामान बेचना पड़ेगा। अगर आपके पास यह नोट है तो लखपति भी बन सकते हैं। इसी साल की शुरुआत में क्लासिकल न्युमिसमैटिक्स गैलरी में 1985 में छपा एक रुपये का नोट दो लाख 75 हज़ार रुपये में बिका था। टोडीवाला ऑक्शन में 1944 में छपे एक रुपये के 100 नोटों की एक गड्डी एक लाख 30 हज़ार रुपये में बिकी।

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