Sun. Jan 20th, 2019

व्यापारियों की उम्मीद हुई धड़ाम

जीएसटी से प्रभावित व्यापारियों को राहत देने के लिए इस बार के आम बजट में जीएसटी की कुछ धाराओं या पॉलिसी मैटर में छोटे- बड़े बदलावों की उम्मीद जताई जा रही थी। लेकिन वित्त मंत्री द्वारा पेश बजट में व्यापारियों को कुछ भी नहीं मिला। न तो जीएसटी में राहत मिली और न ही, इनकम टैक्स छूट के दायरे में कोई बदलाव हुआ।

जीएसटी लागू होने के बाद व्यापारियों पर टैक्स का जबर्दस्त बोझ आ गया है। एक व्यापारी जीएसटी के तहत 18 या 28 प्रतिशत टैक्स देता है। इसके अलावा 30 परसेंट इनकम टैक्स देता है। इस हिसाब ये वह अपनी कमाई का 50 प्रतिशत से अधिक टैक्स देता है, यह वास्तव में बहुत अधिक है.

– महेंद्र गोयल

प्रदेश अध्यक्ष, कैट

व्यापारियों के लिए बजट पूरी तरह से निराशाजनक साबित हुआ है। लेकिन बजट में किसानों और आम जनता का पूरा ध्यान रखा गया है। बीमा योजना से लोगों को काफी लाभ होगा.

– संतोष पनामा

संयोजक, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार कल्याण समिति

देश के छह करोड़ से अधिक छोटे व मझले व्यापारियों ने जीएसटी में राहत की उम्मीद लगा रखी थी। लेकिन वित्त मंत्री ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया.

अनिल गोयल

छोटे व्यापारियों को छोड़ कर सरकार ने इंडस्ट्री के लोगों को बहुत कुछ दिया है। 250 करोड़ से अधिक का टर्न ओवर करने वाले व्यापारियों को 25 प्रतिशत और छोटे व्यापारियों पर 40 प्रतिशत टैक्स लगाया गया है.

– आशीष कुमार

तीन साल से छूट की सीमा में बदलाव नहीं हुआ है। इस बार छूट सीमा में बदलाव की उम्मीद थी। ताकि बढ़ती महंगाई में कुछ राहत मिल सके, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

– भारत हिरानी

नगद लेनदेन व्यापार का जरूरी हिस्सा है। ईज ऑफ डूइंग बिजनस की अवधारणा और परम्परागत तरीके से व्यापार करनेवाले लोगों की सुविधा के मद्देनजर इस लिमिट को बढ़ाने की जरूरत थी, लेकिन सरकार ने इस पर कोई विचार नहीं किया.

– नवीन अग्रवाल

पार्टनरशिप फर्म की ओर से पार्टनर को सैलरी और कैपिटल पर ब्याज देने पर 2016 से पार्टनरशिप फर्म को 44एडी से बाहर कर दिया गया है। इसकी वजह से या तो उन्हें ऑडिट में जाना पड़ता है या ज्यादा टैक्स देना पड़ता है.

– दिलीप केसरवानी

जरूरत पड़ने पर व्यापारी को कई बार जानकारों से नगद (कैश लोन) लेना पड़ जाता है और वापस भी करना पड़ता है। इसकी लिमिट 20 हजार से बढ़ाकर 50 हजार कर किए जाने की मांग चल रही है। लेकिन 29 सालों से यह ज्यों की त्यों है.

– सतीश चंद्र केसरवानी

अध्यक्ष

गल्ला एवं तिलहन संघ

नोटबंदी और जीएसटी के बाद छोटे व्यापारियों पर खर्चे का बोझ और दबाब बढ़ा है। सरकार को इस बजट में छोटे और मझोले व्यापारियों की सहायता और प्रोत्साहन के लिए कोई स्कीम या योजना बनानी चाहिए थी.

– विजय श्रीवास्तव

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