Thu. Feb 21st, 2019

आज जेरूशलम में खुलेगा अमेरिकी दूतावास, इवांका ट्रंप समेत कई अमेरिकी अधिकारी रहेंगे मौजूद

इजरायल के जेरूशलम में आज अमेरिकी दूतावास का उद्घाटन समारोह है। इस दूतावास के खुलते ही अमेरिका पिछले करीब सात दशकों से चली आ रही एक परंपरा को तोड़ देगा और जेरूशलम को इजरायल की राजधानी के तौर पर मान्‍यता देगा। इस कार्यक्रम में अमेरिका के कई टॉप ऑफिशियल्‍स समेत राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की बेटी और ट्रंप प्रशासन में सर्वोच्‍च स्‍थान रखने वाली इवांका ट्रंप भी शामिल होंगी। इवांका ने खुद रविवार को ट्वीट करके इसकी जानकारी दी थी। आपको बता दें कि इवांका के पति जेरार्ड कश्‍नर यहूदी हैं और उनका परिवार इजरायल का ही रहने वाला है। इवांका के साथ जेरार्ड भी जेरूशलम पहुंच चुके हैं।

ट्रंप रहेंगे नदारद

दूतावास की ओपनिंग सेरेमनी में अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के शामिल होने के भी कयास लगाए जा रहे थे। पिछले दिनों ट्रंप ने अपने बयान से इस तरफ इशारा किया था कि वह इजरायल के जेरूशलम में अमेरिकी दूतावास की नई बिल्डिंग का उद्घाटन करने जा सकते हैं। ट्रंप ने यह भी बताया था कि उन्‍होंने जेरूशलम में अमेरिका के नए दूतावास की बिल्डिंग के निर्माण में आ रही एक बिलियन डॉलर की लागत को कम कर दिया है। ट्रंप ने यह बात उस समय कही थी जब वह पिछले हफ्ते जर्मनी की चांसलर एंजेला मार्केल से मुलाकात करने के बाद मीडिया को संबोधित कर रहे थे। ट्रंप ने दिसंबर में जेरूशलम को अमेरिकी राजधानी के तौर पर मान्‍यता देने का ऐलान किया था और कहा था कि वह दूतावास को तेल अवीव से यहां पर शिफ्ट करेंगे। ट्रंप के इस ऐलान ने फिलीस्‍तीन को खासा नाराज कर दिया था।

दूतावास के खर्च को किया काफी कम

दूतावास के बारे में ट्रंप ने कहा, ‘ मुझे इस पर काफी गर्व है। जेरूशलम एक ऐसा विषय रहा है जिस पर पिछले कई वर्षों से वादा किया जाता रहा है।’ आपको बता दें कि अमेरिका ने जेरूशलम को इजरायल की राजधानी माना है। ट्रंप के मुताबिक अमेरिका के कई राष्‍ट्रपतियों की ओर से जेरूशलम को राजधानी बनाने का वादा किया था लेकिन किसी ने भी इसे पूरा करने की हिम्‍मत नहीं दिखाई थी। ट्रंप की मानें तो अमेरिकी दूतावास खुलने के लिए तैयार है और वह इस बारे में भी लोगों को बताना चाहते हैं क्‍योंकि कई लोग हैं जो इसे देखना चाहते हैं लेकिन बाकी लोग इस पर सिर्फ बिलियन डॉलर खर्च करना चाहते थे। ट्रंप ने दावा किया कि उनकी सरकार ने दूतावास में आने वाले खर्च को बहुत कम कर दिया है।

 

 

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