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निकाय चुनाव के पहले दौर का मतदान कल, पहले दौर में दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर

लोक सभा चुनाव के सेमीफाइन माने जा रहे निकाय चुनाव के पहले फेज में 24 जिलों में वोटिंग हो रही है। पहले दौर में शामली, मेरठ, हापुड़, बिजनौर, बदायूं, हाथरस, कासगंज, आगरा, कानपुर, जालौन, हमीरपुर, चित्रकूट, कौशांबी, प्रतापगढ़, उन्नाव, हरदोई, अमेठी, फैजाबाददेवीपाटन, बस्ती, गोरखपुर, आजमगढ़, वाराणसी और मिर्जापुर में वोट डाले जा रहे हैं। इन 24 जिलों में 4 नगर निगम, 71 नगर पालिका परिषद, और 154 नगर पंचायतें हैं। पहले फेज में कई दिग्गजों की साख दांव पर है।

गोरखपुर, गोंडा, बस्ती और अयोध्या में योगी की साख दांव पर

यूं तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर पूरे प्रदेश में कमल खिलाने की जिम्मेदारी है लेकिन पूर्वांचल के गोरखपुर, गोंडा, बस्ती और भगवान राम की नगरी अयोध्या पर उनका विशेष ध्यान है। पूर्वांचल में योगी का काफी प्रभाव माना जाता है। यहां उन पर विधानसबा का प्रदर्शन दोहराने का दबाव होगा…. इसी तरह पहली बार नगर निगम बने अयोध्या-फैजाबाद के नतीजे भी उनकी साख से जुड़े हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद से योगी कई बार अयोध्या का दौरा कर चुके हैं। 18 अक्टूबर को योगी ने अयोध्या में ही दीपोत्सव मनाया था। इसीलिए यहां के चुनावी नतीजों पर देश भर की निगाहें हैं।

कौशांबी में केशव मौर्या पर कमल खिलाने की जिम्मेदारी

यूपी के डिप्टी सीएम केशव मौर्या 2012 में सिराथू से विधानसभा का चुनाव जीते थे। फिर 2014 में मोदी लहर में फूलपुर, इलाहाबाद से सांसद बने… अब जब यूपी के डिप्टी सीएम बने तो वो विधानपरिषद के सदस्य हैं। केशव मौर्या का घर भी कौशाम्बी में है। ऐसे में कौशाम्बी जिताना उनके लिए जरूरी है।

प्रतापगढ़ में राजा भैया, मंत्री मोती सिंह, प्रमोद तिवारी में टक्कर

फर्स्ट फेज में प्रतापगढ़ में भी चुनाव होना है। यहां पूर्व मंत्री राजा भैया, कांग्रेस के प्रमोद तिवारी और मंत्री मोती सिंह की साख दांव पर है।

कासगंज, बदायूं और हाथरस में धर्मेन्द्र यादव पर दारोमदार

कासगंज, बदायूं, और हाथरस की जिम्मेदारी सांसद धर्मेन्द्र यादव पर है। उन पर अपने प्रभाव वाले इलाकों में सपा को जीत दिलाने का दबाव होगा।

हरदोई में सपा के नरेश अग्रवाल की प्रतिष्ठा दांव पर

हरदोई कई साल से सपा के राष्ट्रीय महासचिव नरेश अग्रवाल का गढ़ माना जाता रहा है। उनके बेटे भी लगातार दूसरी बार विधायक बने हैं। हरदोई नगर पालिका की सीट भी पिछले दस सालों से उनके परिवार के पास ही है। हालांकि इस बार उनके कुनबे में भी कलह सामने आई है। ऐसे में इस बार उनके सामने अपने गढ़ को बचाने की बड़ी जिम्मेदारी है।

अमेठी में राहुल गांधी और स्मृति ईरानी आमने-सामने

अमेठी में 2 नगर पालिका और 1 नगर पंचायत हैं। इनमे से से एक नगर पंचायत का अध्यक्ष कांग्रेस समर्थित था। वो भी अब बीजेपी में जा चुका है। अब एक नयी नगर पंचायत गौरीगंज बनी है… ऐसे में स्मृति भगवा फहरा कर राहुल को आइना दिखाने की कोशिश कर सकती हैं।

आजमगढ़, गाजीपुर, सोनभद्र में बलराम यादव की साख दांव पर

आजमगढ़, गाजीपुर और सोनभद्र में मुलायम के नाम पर सपा के लिए वोट बटोरने की जिम्मेदारी अखिलेश यादव ने बलराम यादव को सौंपी है। यादव परिवार में विवाद के बाद विधानसभा चुनाव में मुलायम का गढ़ भी बीजेपी ने भेद दिया था। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि मुलायम के नाम पर बलराम यादव सपा की झोली में कितनी सीटें डालने में कामयाब होते हैं।

उन्नाव, कानपुर में मुरली मनोहर जोशी की साख दांव पर

कानपुर नगर निगम पर तो बीजेपी का कब्ज़ा है। लेकिन अन्दरूनी इलाकों में नगर पंचायतों पर अन्य दल या फिर निर्दलीयों का बोलबाल रहा है। ऐसे में कानपुर और उससे सटे उन्नाव के नतीजे बीजेपी के सीनियर लीडर मुरली मनोहर जोशी की लोकप्रियता का पैमाना साबित हो सकते हैं।

पश्चिमी यूपी में मंत्री सुरेश राणा, संगीत सोम पर जिम्मेदारी

वेस्ट यूपी के शामली, मेरठ, हापुड़ और बिजनौर में निकाय चुनाव की जिम्मेदारी मंत्री सुरेश राणा और विवादित नेता संगीत सोम के ऊपर है। ये दोनों ही अपने बयानों से चर्चा में रहे हैं। ऐसे में निकाय चुनावों में इनकी परफोर्मांस पर सबकी नजर है।

जालौन, हमीरपुर और चित्रकूट की जिम्मेदारी स्वतंत्रदेव सिंह पर

पहले फेज में बुंदेलखंड के 3 जिलों जालौन, हमीरपुर और चित्रकूट में चुनाव हो रहा है। अभी तक इन तीनो जिलों में नगर पालिका या नगर पंचायतों में निर्दलीय और अन्य दलों का कब्ज़ा ज्यादा रहा है। इस बार संगठनिक क्षमता में माहिल माने जाने वाले स्वतंत्र देव सिंह पर भगवा फहराने की बड़ी जिम्मेदारी है।

निकाय चुनाव के पहले दौर के प्रचार में बीजेपी ने पूरी ताकत झोंकी थी। खुद मुख्यमंत्री, दोनों डिप्टी सीएम समेत कई बड़े नेताओं ने पार्टी का प्रचार किया। विपक्ष के बड़े नेता तो प्रचार से दूर रहे लेकिन प्रत्याशियों ने एड़ी चोटी का जोर लगाया है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि… पहले दौर में कौन बचा पाता है अपनी साख… और कौन हासिल करेगा के चुनावी रण में फतह।

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