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आखिर क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दामSite Preview has beeb Completed

पेट्रोल का दाम तीन साल में सबसे अधिक हो गया है। देश के कई राज्यों में डीजल की कीमत भी रेकॉर्ड लेवल पर पहुंच गई है । इंटरनैशनल मार्केट में कच्चे तेल का दाम 70 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने से देश में पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स के दाम बढ़े हैं।

डीजल की कीमत रेकॉर्ड लेवल पर पहुंच गई है। मुंबई में इसका दाम सितंबर 2014 के बाद सबसे ज्यादा हो गया है। इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन (आईओसी) की वेबसाइट के मुताबिक, सोमवार को दिल्ली में डीजल की कीमत 61.74 रुपये प्रति लीटर, कोलकाता में 64.40 रुपये, मुंबई में 65.74 रुपये और चेन्नै में 65.08 रुपये प्रति लीटर रही। सरकारी तेल कंपनियों और प्राइवेट फर्मों की पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुछ पैसों का अंतर होता है।

किस राज्य में टूटा कब का रेकॉर्ड?
दिल्ली और चेन्नै में पेट्रोल की कीमतें अगस्त 2014 के बाद से सबसे ज्यादा हैं। कोलकाता में कीमतें जुलाई 2015 के बाद सबसे अधिक हैं जबकि मुंबई में अक्टूबर 2017 के बाद दाम सबसे ज्यादा हो गया है। सोमवार को दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 71.18 रुपये प्रति लीटर, कोलकाता में 73.91 रुपये, मुंबई में 79.06 रुपये और चेन्नै में 73.80 रुपये प्रति लीटर रही।

दुनियाभर में बढ़ीं कीमतें
ब्लूमबर्ग के आंकड़े के मुताबिक, 1 जुलाई 2017 से अंतरराष्ट्रीय मार्केट में क्रूड ऑइल 46 पर्सेंट चढ़ा है जबकि डीजल 42 पर्सेंट और पेट्रोल 22 पर्सेंट महंगा हुआ है। 1 जुलाई 2017 के बाद से दिल्ली में डीजल और पेट्रोल की कीमतें क्रमश: 16 पर्सेंट और 13 पर्सेंट चढ़ी हैं।

क्यों बढ़े दाम?
गौरतलब है कि पेट्रोल और डीजल पर कुछ साल पहले सब्सिडी खत्म कर दी गई थी। लोकल टैक्स की वजह से राज्यों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अंतर रहता है। ऑर्गनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (ओपेक) और रूस के प्रॉडक्शन में कटौती के लिए अग्रीमेंट का बढ़ना पिछले 6 महीने में फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी का एक बड़ा कारण रहा है। तेल उत्पादक देशों ने कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बावजूद प्रॉडक्शन में कटौती जारी रखने का फैसला किया है। मजबूत इकनॉमिक ग्रोथ के बीच ऑइल की डिमांड में इजाफा हो रहा है और इसके चलते कीमतों में तेजी आ रही है।

देश में कैसे तय होती है कीमत?
सरकारी तेल कंपनियों का देश के फ्यूल रिटेल मार्केट के 90 पर्सेंट से ज्यादा पर कब्जा है। कंपनियां मार्केटिंग मार्जिन, डीलर कमीशन और सरकारी शुल्कों को जोड़कर पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमत तय करती हैं। फ्यूल के रिफाइनरी गेट प्राइसेज पेट्रोल और डीजल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों से जुड़े हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय मार्केट में पेट्रोल और डीजल की कीमतें मोटे तौर पर क्रूड प्राइसेज की तर्ज पर चलती हैं, हालांकि किसी खास फ्यूल की डिमांड-सप्लाई समीकरण, रिफाइनिंग या ट्रांसपोर्टेशन कपैसिटी की दिक्कतों और अन्य कारोबार या भूराजनैतिक घटनाओं का भी इन पर असर दिखाई देता है।

विकास योजनाओं पर बढ़ती कीमतों का असर
क्रूड की ऊंची कीमतें भारत जैसे तेल की भारी खपतवाले देशों के लिए अच्छी नहीं हैं। भारत अपनी जरूरत का करीब 82 पर्सेंट हिस्सा आयात करता है। तेल की ऊंची कीमतें महंगाई को बढ़ाती हैं और इससे आरबीआई के लिए रेट कट करना मुश्किल होता है। इससे विदेशी मुद्रा की डिमांड बढ़ती है और सरकार के पास विकास के लिए कम पैसा बचता है।

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