Mon. Dec 17th, 2018

डायल 100 का कायाकल्प करने जा रही योगी सरकार

उत्तर प्रदेश में डायल 100 को एसपी (समाजवादी पार्टी) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का ड्रीम प्रॉजेक्ट माना जाता है। हालांकि, इस प्रॉजेक्ट का राज्य की मौजूदा योगी सरकार कायाकल्प करने जा रही है। यह जानकारी यूपी के डीजीपी ओपी सिंह ने दी।

 डीजीपी ने कहा कि राज्य सरकार डायल-100 सेवा का कायाकल्प करने जा रही है। मूलभूत ढांचे और प्रौद्योगिकीय उन्नयन के जरिए ऐसा किया जाएगा। इसके लिये चारपहिया वाहनों के साथ-साथ मोटरसाइकलें भी खरीदी जाएंगी। उन्होंने कहा कि पुलिस अफसरों की कार्यशैली को बेहतर बनाने के लिये उन्हें भ्रष्टाचार रोकने और मुकदमा दर्ज होने के फौरन बाद हरकत में आने के निर्देश दिए गए हैं। हमारा जोर है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद उसे जल्द से जल्द तार्किक निष्कर्ष तक भी पहुंचाया जाए ताकि अपराधियों को कोई राहत ना मिल सके।

अखिलेश ने की थी शुरुआत 
बता दें कि एसपी सरकार के कार्यकाल में 2 अक्टूबर 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने डायल 100 योजना की शुरुआत की थी। मौका-ए-वारदात पर पुलिस टीम के जल्द पहुंचने को सुनिश्चित करना इसका मकसद है। इस प्रॉजेक्ट में 3200 गाड़ियों के काफिले को मंजूरी मिली थी, जिसमें 700 इनोवा और 2500 बोलेरो गाड़ियां शामिल थीं।

सेवा के विस्तार के लिए योगी सरकार ने जारी किया फंड 
इससे पहले सितंबर (2017) में योगी सरकार ने इस सेवा के विस्तार के तहत 1600 मोटरसाइकल और खरीदने के लिए फंड जारी किया था। यूपी के गृह सचिव भगवान स्वरूप की तरफ से उत्तर प्रदेश पुलिस हेडक्वॉर्टर को जारी खत में कहा गया, ‘20.99 करोड़ रुपये की मांग के बाद कुल 11.33 करोड़ रुपये की धनराशि को मंजूर किया गया है। डायल 100 स्कीम के लिए 1600 मोटरसाइकल खरीदी जाएंगी।’

‘अपराधों को रोकना है प्राथमिकता’ 
इसके इतर उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठने के बीच राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ओम प्रकाश सिंह का कहना है कि उनका महकमा अपराध के मौजूदा तौर-तरीकों का गहन अध्ययन कर रहा है। खासतौर पर महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों के खिलाफ होने वाले अपराधों की रोकथाम उनकी प्राथमिकता है।

डीजीपी ने कहा कि कड़क अंदाज के साथ बेसिक पुलिसिंग उनका मूल मंत्र है। आम लोगों में सुरक्षा की भावना और अपराधियों में पुलिस का खौफ पैदा करना उनकी प्राथमिकता है। कोशिश है कि जनता के बीच पुलिस की छवि एक मित्र की बने।

जानिए, क्या है मुख्य उद्देश्य 
सिंह ने मीडिया से बातचीत में अत्याधुनिक तकनीक से लैस अपराधियों और साइबर क्राइम के पेचीदा मामलों की चुनौतियों के बारे में कहा, ‘हम अपराध के मौजूदा और नए-नए तरीकों का गहन अध्ययन कर रहे हैं ताकि समय रहते उनकी रोकथाम हो सके। हमारा खास ध्यान महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों के प्रति होने वाले अपराधों के नियंत्रण पर है।’

‘कानून हाथ में लेने वालों को नहीं बख्शा जाएगा’ 
प्रदेश में सांप्रदायिक दंगे की एक भी घटना से इनकार करते हुए पुलिस प्रमुख ने कहा, ‘कुछ जिलों में दो पक्षों के बीच टकराव की घटनाएं जरूर हुईं लेकिन उन्हें समय रहते काबू कर लिया गया। कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश पिछले एक साल से पूरी तरह दंगामुक्त है।’ कासगंज में पिछली 26 जनवरी को हुई सांप्रदायिक हिंसा के बारे में उन्होंने कहा कि वहां भी दो पक्षों के बीच हिंसा हुई, जिसे प्रभावी ढंग से रोक लिया गया है। जहां तक प्रदेश में जगह-जगह तिरंगा यात्रा तथा अन्य यात्राएं निकाले जाने का सवाल है तो स्थानीय प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कानून हाथ में लेने वालों को कतई ना बख्शा जाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *