हरिद्वार और देहरादून का चांदपुर बदला, चमोली का चांदपुर गढ़ी कब बदलोगे सरकार!

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देहरादून। कल तक सांसद त्रिवेन्द्र के अवैध खनन के बयान की चर्चा थी। विपक्षी प्रदेश सरकार पर हमलावर थे। सत्ता पक्ष को जवाब देते नहीं बन रहा था। सोशल मीडिया से लेकर चाय की दुकानों पर प्रदेश भर में त्रिवेन्द्र के बयान की चर्चा चल रही थी। लेकिन धाक़ड़ धामी ने ऐसा मास्टर स्ट्रोक ने मारा कि रातोंरात चर्चा का सब्जेक्ट ही बदल गया है। अब विपक्षी को पिछला मुद्दा छोड़ नये सब्जेक्ट पर ही बयान देने होंगे।

चार जिलों में 15 जगहों के नाम बदले
धामी सरकार ने सोमवार को अहम फैसला लेते हुए जिला हरिद्वार, देहरादून, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में स्थित 15 स्थानों के नाम में परिवर्तन की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न स्थानों के नाम में परिवर्तन जन भावना और भारतीय संस्कृति व विरासत के अनुरूप किया जा रहा है। जिससे लोग भारतीय संस्कृति और इसके संरक्षण में योगदान देने वाले महापुरुषों से प्रेरणा ले सकें।
हरिद्वार
भगवानपुर ब्लॉक के औरंगजेबपुर का नाम बदलकर शिवाजी नगर, बहादराबाद ब्लॉक के गाजीवाली का नाम आर्य नगर, चांदपुर का नाम ज्योतिबाफुले नगर, नारसन ब्लॉक के मोहम्मदपुर जट का नाम मोहनपुर जट, खानपुर कुर्सली का नाम आंबेडकर नगर, खानपुर ब्लॉक के इदरीशपुर का नाम नंदपुर, खानपुर का नाम कृष्णपुर और अकबरपुर फाजलपुर का नाम विजयनगर किया गया है।

देहरादून
देहरादून नगर निगम के मियांवाला का नाम रामजीवाला, विकासनगर ब्लॉक का पीरवाला का नाम केसरी नगर, चांदपुर खुर्द का नाम पृथ्वीराज नगर, सहसपुर ब्लॉक के अब्दुल्लापुर का नाम दक्षनगर किया गया है।

नैनीताल
नवाबी रोड का नाम अटल मार्ग किया गया है। पनचक्की से आईटीआई मार्ग का नाम गुरु गोवलकर मार्ग हुआ है।

उधम सिंह नगर
यहां नगर पंचायत सुल्तानपुर पट्टी का नाम कौशल्या पूरी किया गया है।

सोशल मीडिया पर चर्चा

सोशल मीडिया में देहरादून के मियांवाला के नाम बदलने की सबसे ज्यादा चर्चा है। वरिष्ठ पत्रकार त्रिलोचन भट्ट अपने फेसबुक पेज में लिखते हैं ‘मियां’ पहाड़ी राजपूत होते हैं मियांजी
इसे नफरत की पराकाष्ठा कहें या कुछ और कि सरकार ने देहरादून की एक छोटी सी जगह ष्मियांवालाष् का नाम भी बदल दिया है।
जिन जगहों के नाम बदले गए हैं, उनकी लिस्ट बताती है कि ऐसे गांवों और जगहों के नाम बदले गए हैं जिनके नाम मुस्लिम टाइप के हैं।
ईद के दिन ये लिस्ट जारी करना भी एक रणनीति है, हालांकि बेहद भोथरी किस्म की रणनीति हैँ
इसी नफरती मानसिकता की चपेट में मियांवाला भी आ गया।
सच्चाई यह है कि इस जगह जो परिवार सबसे पहले आकर बसा, वह मियां जाति के पहाड़ी राजपूत हैं।
इस परिवार का एक लड़का कुछ साल पहले मेरे साथ काम करता था। ये परिवार अब बढ़ गये हैं और यहीं रहते हैं।
पर जब दिमाग में नफरत भरी हो तो इन बातों पर कहां ध्यान जाता है।
वहीं वे एक अन्य पोस्ट में लिखते हैं कि हरिद्वार का चांदपुर बदला, देहरादून का चांदपुर खुर्द बदला, चमोली का चांदपुर गढ़ी क्यों नहीं बदला?
पता भी है, वहां के लोग कितने असुरक्षित हो गये हैं?
अरूण नेगी इस पर कमेंट करते है कि नीति घाटी का जुम्मा गांव, चमोली जिले की निजमुला घाटी के लोग भी इंतजार में है कि कब नाम बदलेगा?

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पहले प्रेमचंद अग्रवाल की #गाली और #लिव_इन/यूसीसी से ध्यान भटकाने के लिए अवैध मदरसों पर कार्यवाही करनी पड़ी,फिर राजकुमार पोरी के #गुलामी वाले बयान से पल्ला छुड़ाने के लिए #जिहाद पर कुचक्र रचना पड़ा अब त्रिवेंद्र रावत जी के बयान से पीछा छुड़ाने के लिए सब जगह के नाम बदलने पड़े

जब जब भाजपा डरती और फंसती है हिंदू मुस्लिम करती है

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